जशपुर वनमण्डल में वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं वन्यजीव अपराधों की रोकथाम हेतु विस्तृत प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित
जशपुर : जशपुर वनमण्डल अंतर्गत वन्यप्राणियों के संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा, वन्यजीव अपराधों की रोकथाम तथा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से दिनांक 10.10.2026 को समस्त परिक्षेत्राधिकारियों, वन परिक्षेत्र सहायकों एवं बी.एफ. ओ. के लिए विस्तृत प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों, विभागीय दायित्वों, अपराधों की पहचान, प्रकरणों की विवेचना तथा न्यायालयीन प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
कार्यशाला का उद्देश्य मैदानी स्तर पर कार्यरत वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वन्यजीव संरक्षण कानूनों के प्रति जागरूक करना, उनकी कानूनी समझ को सुदृढ़ करना तथा वन्यजीव अपराधों से संबंधित मामलों में नियमानुसार प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु प्रशिक्षित करना रहा।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जशपुर द्वारा अपने अनुभव साझा करते हुए वन्यजीव संरक्षण एवं वन्यजीव अपराधों की रोकथाम में पुलिस और वन विभाग के बीच आपसी समन्वय के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने अपराधों की रोकथाम, आवश्यक साक्ष्यों के संकलन तथा संबंधित मामलों में विधिसम्मत कार्यवाही के लिए विभागों के मध्य बेहतर तालमेल की आवश्यकता को रेखांकित किया।
तत्पश्चात वनमण्डलाधिकारी, जशपुर द्वारा उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए वन्यप्राणियों के संरक्षण को वन विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया गया। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए केवल वन क्षेत्रों की सुरक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वन्यजीव अपराधों के प्रति सतर्कता, कानूनों की समुचित जानकारी, समयबद्ध कार्यवाही तथा मैदानी अमले की सक्रिय भूनिका भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों का गंभीरतापूर्वक अध्ययन करने तथा अपने दैनिक कार्यों में उनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला में डॉ. राजेन्द्र मिश्रा, वैज्ञानिक एवं सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड तथा प्रो. एम.एल. नायक, सदस्य, छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड द्वारा जैव विविधता के महत्व, वन्यजीवों एवं उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में वन विभाग की भूमिका पर अपने अनुभव साझा किए गए। उन्होंने जैव विविधता के संरक्षण को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
इसके पश्चात जबलपुर के अधिवक्ता श्री यश कुमार सोनी द्वारा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तकनीकी एवं कानूनी पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। उनके द्वारा अधिनियम के प्रावधानों, वन्यजीव अपराधों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं तथा अपराध प्रकरणों में नियमानुसार कार्यवाही के महत्व पर जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि वन्यजीव अपराधों से संबंधित प्रकरणों में वैधानिक प्रक्रिया का पालन, साक्ष्यों का उचित संकलन एवं संधारण तथा प्रकरणों का विधिसम्मत निराकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन करने, संदिग्ध गतिविधियों पर सत्तत निगरानी रखने तथा वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए सजग एवं सक्रिय रहने हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इस प्रशिक्षण सह कार्यशाला में डॉ. राजेन्द्र मिश्रा, वैज्ञानिक एवं सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड, प्रो. एम.एल. नायक, सदस्य, छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जशपुर, वनमण्डलाधिकारी, जशपुर, समस्त उपवनमण्डलाधिकारी, परिक्षेत्राधिकारी, वन परिक्षेत्र सहायक एवं बीट वनपाल सहित वनमण्डल का मैदानी वन अमला उपस्थित रहा।
जशपुर वनमण्डल द्वारा इस प्रकार की प्रशिक्षण गतिविधियों के माध्यम से वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कानूनी दक्षता बढ़ाने, वन्यजीव अपराधों की रोकथाम को प्रभावी बनाने तथा वन्यजीव एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रति विभागीय प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

