रायपुर : खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल, एवं विभागीय सचिव, श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले द्वारा विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर आज छत्तीसगढ संवाद के आडिटोरियम (अटल नगर, नवा रायपुर) में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संयुक्त रूप से संबोधित किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैः-
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की उपलब्धियां
राज्य के निवासियों के लिए खाद्यान्न की पर्याप्त मात्रा तथा अक्षय आहार की अन्य आवश्यकताओं की पहुंच सुनिश्चित कराते हुए उन्हें सम्मानजनक जीवनयापन करने के लिए सदैव उचित मूल्य पर खाद्य तथा आहार सुरक्षा उपलब्ध कराने एवं उससे संबंधित अथवा आनुषंगिक विषयों हेतु छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 राज्य में प्रभावशील है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली का क्रियान्वयन एवं खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना, किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, आम उपभोक्ताओं के लिए सही माप-तौल की वस्तुएं उपलब्ध कराना तथा उपभोक्ताओं के अधिकारों के संरक्षण खाद्य विभाग के प्रमुख मूलभूत दायित्व में शामिल है। विभाग निरंतर इन सभी दायित्वों को भली-भांति पूरा कर रहा है।
1. सार्वजनिक वितरण प्रणाली
1.1 खाद्य सुरक्षा से लाभान्वितों की संख्या में वृद्धि
राज्य में जनवरी 2024 में 77 लाख राशनकार्ड प्रचलित थे इनमें शामिल 2.69 करोड़ व्यक्तियों अर्थात राज्य की 86 प्रतिशत् जनसंख्या (2024 की अनुमानित जनसंख्या के आधार पर) को रियायती दर पर चावल का वितरण किया जा रहा था। वर्तमान में कुल 83.36 लाख राशनकार्ड प्रचलित है। इन राशनकार्डों में 2.73 करोड़ सदस्य पंजीकृत है। वर्तमान में राज्य के 87 प्रतिशत जनसंख्या (2026 की अनुमानित जनसंख्या के आधार पर) को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराया जा रहा है। विगत 3 वर्ष के दौरान राज्य में लगभग 10.44 लाख नवीन राशनकार्ड जारी किये गये तथा 16.93 लाख नवीन सदस्य राशनकार्डो में जोड़े गये है।
1.2 नवीन उचित मूल्य दुकानों का आबंटन
राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत वर्तमान में 14182 शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालित है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुचारू क्रियान्वयन एवं हितग्राहियों को खाद्यान्न प्राप्त करने में आसानी हो एवं समय पर खाद्यान्न प्राप्त हो सके इसलिए विगत 3 वर्षों में 445 नवीन उचित मूल्यों दुकानों का आबंटन करके खाद्यान्न वितरण कराया जा रहा है।
1.3 राशनकार्ड नवीनीकरण
खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत जनवरी 2024 में कुल प्रचलित 77.10 लाख राशनकार्डों में से 73.94 लाख राशनकार्डो का नवीनीकरण कराया गया है। राशनकार्ड नवीनीकरण से राशनकार्ड का डेटाबेस त्रुटिरहित हुआ है।
1.4 चावल वितरण
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अंत्योदय, प्राथमिकता, निराश्रित एवं निशक्तजन परिवारों को मासिक पात्रता अनुसार चावल निशुल्क तथा सामान्य श्रेणी के परिवारों को मासिक पात्रता अनुसार चावल 10 रुपये / किलो के उपभोक्ता दर से वितरण किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य के 83.36 लाख राशनकार्डधारी परिवार को लाभान्वित किया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक राशनकार्डधारियों को 74.89 लाख टन चावल का वितरण किया गया है।
1.5 बस्तर संभाग के जिलों में गुड़ वितरण
राज्य के बस्तर संभाग के निवासियों में आयरन की कमी दूर करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत बस्तर संभाग के 7.97 लाख अंत्योदय, प्राथमिकता, अन्नपूर्णा, एकल निराश्रित एवं निःशक्तजन राशनकार्डधारियों को जनवरी 2020 से प्रतिमाह रियायती दर 17 रूपये प्रति किलो उपभोक्ता दर पर 02 किलो गुड़ प्रदाय किया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक राशनकार्डधारियों को 26,723 टन गुड़ का वितरण किया गया है।
1.6 चना वितरण
राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों एवं माडा क्षेत्र के अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों के भोजन में प्रोटीन की कमी पूरा करने हेतु रियायती दर 5 रूपये प्रतिकिलो की दर पर प्रतिमाह 2 किलो चना प्रदाय किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 31.64 लाख अन्त्योदय एवं प्राथमिकता राशनकार्डधारी परिवार को लाभान्वित किया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक राशनकार्डधारियों को 1.43 लाख टन चना का वितरण किया गया है।
1.7 रिफाईन्ड आयोडाईज्ड नमक वितरण
राज्य के निवासियों में आयोडीन की कमी से होने वाले बीमारियों से बचाव के लिये वर्ष 2004 से पीडीएस के अंतर्गत अंत्योदय एवं प्राथमिकता राशनकार्डधारी परिवारों को अनुसूचित क्षेत्र में 02 किलो तथा गैर अनुसूचित क्षेत्र में 01 किलो आयोडीनयुक्त नमक का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य के 74.46 लाख राशनकार्डधारी परिवार को लाभान्वित किया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक राशनकार्डधारियों को 2.69 लाख टन नमक़ का वितरण किया गया है।
1.8 शक्कर वितरण
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों को प्रतिमाह 01 किलो शक्कर 17 रूपये प्रतिकिलो की उपभोक्ता दर पर वितरण किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य के 74.46 लाख राशनकार्डधारी परिवार को लाभान्वित किया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक राशनकार्डधारियों को 1.95 लाख टन शक्कर का वितरण किया गया है।
1.9 चावल उत्सव
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राशन सामग्री वितरण की नियमित निगरानी के लिए वर्ष 2008 से चावल उत्सव प्रारंभ किया गया है। जिन गांवों में उचित मूल्य दुकान संचालित है, वहां चावल उत्सव प्रत्येक माह में 06 तारीख के बाद लगने वाले प्रथम हाट-बाजार के दिन तथा शेष उचित मूल्य दुकानों में प्रत्येक माह की 07 तारीख को चावल उत्सव आयोजित किया जाता है। चावल उत्सव के दौरान जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी एवं उचित मूल्य दुकान की निगरानी समिति के समक्ष राशनकार्डधारियों को राशन सामग्री का वितरण किया जाता है। चावल उत्सव के आयोजन से राशनकार्डधारियों को समय पर राशन सामग्री प्राप्त हो जाती है।
2. अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम (Grain ATM)
छत्तीसगढ़ के पहले 03 अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर में संचालित है। ग्रेन एटीएम का संचालन 08 अगस्त 2026 से प्रारंभ किया गया है। देश के 4 राज्यों- उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और मेघालय में यह संचालित है, इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ पांचवा राज्य है। ग्रेन एटीएम छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक एवं पीडीएस के लिए पारदर्शी डिजिटल क्रांति है। ग्रेन एटीएम मशीन में हितग्राही अपना राशनकार्ड नंबर या आधार नंबर दर्ज करके बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से अपनी सुविधा अनुसार 24×7 कभी भी खाद्यान्न प्राप्त कर सकते है। राज्य में ग्रेन एटीएम के संचालन से राशनकार्डधारियों को उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न लेने के लिए लाईन लगने के झंझट से मुक्त हो जाएंगे तथा अपनी सुविधा अनुसार एटीएम से चावल ले सकते है।
3. शहरी गैस वितरण (City Gas Distribution) व्यवस्था
राज्य में शहरी गैस वितरण (City Gas Distribution) व्यवस्था क्रियान्वित करने हेतु आवश्यक कार्यवाही प्रारम्भकर दिया गया है, राज्य में इस हेतु CGD पालिसी 5 मई 2026 से प्रभावशील है। उक्त योजना द्वारा पाइपलाइन के माध्यम से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक रसोई गैस (PNG) और वाहनों के लिए पेट्रोल पंपों तक संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) की आपूर्ति किया जावेगा। पीएनजी (Piped Natural Gas) सीधे पाइपलाइन के माध्यम से घरों में रसोई गैस के रूप में पहुंचती है। इसमें आम जनता को सिलेंडर बदलने की समस्या नहीं होगी तथा गैस के उपयोग अनुसार बिल का भुगतान किया जावेगा | सीएनजी (Compressed Natural Gas) ऑटोमोबाइल वाहनों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्राकृतिक गैस, जिसे पंपों पर उच्च दबाव में संपीडित किया जाता है। यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में काफी सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल है।
उक्त योजना के क्रियान्वयन हेतु आवेदन से अनुमोदन तक की प्रक्रिया हेतु ऑनलाइन पोर्टल के निर्माण की कार्यवाही पूर्ण कर ली गयी है | वर्तमान में राज्य के 2 शहरों रायपुर एवं मनेन्द्रगढ़ के कुछ घरों में में PNG की आपूर्ति प्रारम्भ कर दी गयी है तथा आगामी 6 माह में राज्य के 7 अन्य नगरों में इसका विस्तार किया जाएगा | वर्ष 2030 तक प्रदेश के 42 लाख घरो को इस योजना से लाभान्वित किये जाने का लक्ष्य है।
4. नियद नेल्लानार योजना 2.0
नियद नेल्लानार 2.0 योजना के अंतर्गत 10 जिले बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, मोहला मानपुर, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव, खैरागढ़-छुईखदान एवं गरियाबंद के ग्रामीण क्षेत्रो में कुल 11.41 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को प्रतिमाह खाद्यान्न, चना, शक्कर, नमक व गुड़ को मासिक पात्रता अनुसार वितरण किया जा रहा है।
5. प्रधानमंत्री उज्जवला योजना
राज्य के महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए तथा ग्रामीण और सुदूर अंचल में प्रदूषण रहित स्वच्छ इंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री उज्जवला योजना संचालित है। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत बीपीएल महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत अब तक 39 लाख महिलाओं को गैस कनेक्शन जारी किया गया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 3.0 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य गैस कनेक्शन वितरण में देश में चौथा अग्रणी राज्य है।
समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन
हमारी सरकार ने किसान हित में वर्ष 2023 से धान उपार्जन की सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़ाकर 21 क्विंटल प्रति एकड़ कर दी है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने उपार्जित धान की राशि रू. 2300 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर राशि रू. 3100 प्रति क्विंटल की गयी है। इसके फलस्वरूप राज्य में लगभग 25 लाख किसानों को समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का लाभ प्राप्त हो सका है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में प्रदेश में थान खरीदी के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है। 2739 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.49 लाख किसानों से रिकॉर्ड 149.25 लाख मे. टन धान की खरीदी की गई है, जो कि राज्य गठन के बाद सर्वाधिक है, इसी प्रकार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 2740 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मे. टन धान की खरीदी की गयी। तथा प्रदेश के पात्र किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तक धान का उपार्जन किया जा रहा है एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त कृषक उन्नति योजना अंतर्गत प्रदाय राशि मिलाकर कुल 3100/- रू. प्रति क्विंटल भुगतान किया जा रहा है, जो कि देश में सर्वाधिक है। हमारा राज्य धान के उपार्जन का सर्वाधिक मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य है। 2024-25 में 25.49 लाख किसानों को समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना अंतर्गत कुल राशि रू.46289 करोड़ अंतरित की गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों को समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना अंतर्गत कुल राशि रू. 43723 करोड़ अंतरित की गई है। किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने हेतु हमारी सरकार ने खरीदी के 48 घंटे के भीतर समर्थन मूल्य की राशि उनके खातों में ऑनलाइन स्थान्तरित की। राज्य के सभी जिलों में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बिना किसी व्यवधान के पूर्ण की गयी।
राज्य के सभी 2740 धान उपार्जन केन्द्रों में किसानों की सुविधा हेतु पारदर्शी टोकन प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, नमी मापक यंत्र, बारदाना एवं अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की गयी थी। धान उपार्जन के समानांतर किसानों को भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने हेतु छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वर्ष 2025 26 में धान खरीदी के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य विपणन संघ को 15000 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी दी थी। विगत 2.5 वर्षों में प्रदेश के राईस मिलरों को प्रोत्साहन सह मिलिंग शुल्क कुल राशि रू. 4400 करोड़ राशि का भुगतान किया गया है, जो कि राज्य गठन के बाद सर्वाधिक है। मिलरों के भुगतान की प्रणाली को पूर्णतः ऑनलाईन एवं पारदर्शी तरीके से क्रियान्वित किया गया है। साथ ही प्रदेश के 2740 समितियों को विभिन्न मदों में विगत 2.5 वर्षों में लगभग सकल राशि 2371 करोड़ रू. अंतरित किये गये है। किसानों की सुविधा एवं बेहतर चिन्हांकन के दृष्टिगत प्रदेश के सभी उपार्जन केन्द्रों में बायोमेट्रिक डिवाईस के माध्यम से धान खरीदी की गयी। जिससे रियल टाईम में किसानों से धान खरीदी संभव हो सकी साथ ही आधार सत्यापन के माध्यम से फर्जी धान उपार्जन को नियंत्रित किया गया। विपणन संघ मुख्यालय स्तर पर इन्टीग्रेटेड कन्ट्रोल एंड कमांड सेन्टर के माध्यम से धान उपार्जन एवं निराकरण की प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं को नियंत्रित किया गया। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 9.73 लाख क्विंटल अवैध धान का परिवहन जब्त किया गया जिससे शासन को लगभग 301.89 करोड़ की बचत हुयी है इस वर्ष सभी संग्रहण केंद्रों तक भी इस सेंटर का विस्तार किया जाएगा।
धान खरीदी व्यवस्था में प्रदेश में किये गए डिजिटल नवाचारों के माध्यम से फर्जी पंजीयन, अन्य राज्यों से धान की आवक, बिचौलियों की भूमिका, अवैध रीसाइक्लिंग तथा गैर-कृषकों की प्रविष्टियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। इन सुधारात्मक उपायों से राज्य शासन को लगभग ₹4000 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत हुई है।
खरीफ वर्ष 2026-27 में धान खरीदी हेतु किसान पंजीयन प्रारंभ हो गए है। किसान पंजीयन की समयावधि 1 जुलाई 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई है। इस वर्ष हमारी सरकार ने किसान हित में बड़ा फैसला लेते हुए एग्रिस्टेक आईडी युक्त विगत वर्ष के पंजीकृत सभी कृषको को धान विक्रय हेतु मान्य किया है इन किसानों को पृथक से पंजीयन की कोई आवश्यकता नही होगी केवल नई भूमि खरीदी / ब्रिकी/ नामांतरण / बटवारे के स्थिति में उसकी मैपिंग समिति से कराने की आवश्यकता होगी। FRA पट्टाधारी, डुबान, शासकीय पट्टेदार एवं अन्य पात्र श्रेणियों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर एग्रिस्टेक आईडी प्रदान की जा रही है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से प्रत्येक खसरा एवं कम्पार्टमेंट स्तर पर वास्तविक फसल क्षेत्र का ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में प्रदेश के सभी संग्रहण केंद्रों में यथासंभव डिजिटल तौल E-weigh brigde की स्थापना की जायेगी | धान उठाव, कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन कार्य एवम सार्वजनिक वितरण प्रणाली में परिवहन लागत को नियंत्रित करने हेतु भारत सरकार के रूट ऑप्टिमाइजेशन टूल को लागू किया जाएगा।
खाद्यान भण्डारण क्षमता का विस्तार
विगत 03 वर्षों में 27 जिलों के 55 स्थानों पर 2.94 LMT के नवीन गोदाम निर्माण कार्य पूर्ण किये गए है एवं वर्तमान में 08 जिले के 13 स्थानों पर 89,088 MT के गोदाम निर्माण कार्य प्रगतिरत है
विधिक माप विज्ञान
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ विधिक मापविज्ञान (प्रवर्तन) नियम, 2011 में प्रस्तावित संशोधनों के माध्यम से व्यापार सुगमता, अनुपालन सरलीकरण तथा पारदर्शिता को बढ़ावा देने की पहल की गई है। संशोधनों के तहत निर्माताओं, मरम्मतकर्मियों एवं विक्रेताओं के लिए लाइसेंस की व्यवस्था को समाप्त करते हुए ऑनलाइन पंजीयन और स्व-घोषणा आधारित प्रक्रिया लागू की जाएगी, जिससे पूर्व निरीक्षण की आवश्यकता समाप्त होगी तथा पंजीयन की वैधता स्थायी रहेगी। साथ ही, सरकारी संस्थाओं और मान्यता प्राप्त निजी पक्षों को सत्यापन एवं निरीक्षण कार्यों में शामिल करने तथा नवीनीकरण आवेदन लंबित रहने तक उपकरणों के उपयोग की अनुमति देने की व्यवस्था की गई है।
संशोधनों के अंतर्गत LPG, CNG, LNG, Liquid Nitrogen, विभिन्न धातुओं एवं वन उत्पादों को भी दायरे में शामिल किया गया है। प्रवर्तन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ऑनलाइन इम्प्रूवमेंट नोटिस, कंपाउंडिंग की सुविधा तथा उल्लंघनों पर दंडात्मक एवं न्यायालयीन कार्रवाई के प्रावधानों को भी सुदृढ़ किया गया है। इन सुधारों से नियामकीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता और व्यवसाय अनुकूल वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।
उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग
उपभोक्ता आयोगों को अधिक सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए राज्य में डिजिटल और संस्थागत सुधारों को बढ़ावा दिया गया | ई-हियरिंग सेवा भारत में पहली बार छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा प्रारंभ की गई है। ई-हियरिंग प्रणाली को जिला आयोगों में चरणबद्ध रूप से लागू किया गया है, जिसके तहत 18 जिलों में यह सुविधा उपलब्ध है तथा वर्ष 2024-25 में बलौदा बाजार, बलोद और मुंगेली जिले भी इससे जोड़े गए हैं।
अक्टूबर 2023 से जुलाई 2026 की अवधि में राज्य उपभोक्ता आयोग को प्राप्त 2,058 शिकायतों में से 1,720 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिससे लगभग 84 प्रतिशत निपटान दर प्राप्त हुई। इसी अवधि में जिला उपभोक्ता आयोगों द्वारा कुल 10,891 मामलों का निपटारा किया गया।
उपभोक्ताओं को प्रतिकर दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। अक्टूबर 2023 से जुलाई 2026 के दौरान कुल शिकायतों में ₹16.88 करोड़ की क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की गई, जिसमें से ₹16.02 करोड़ की राशि प्रभावित पक्षकारों को भुगतान की जा चुकी है।
इसके अतिरिक्त, बेमेतरा में नया जिला उपभोक्ता आयोग तथा रायपुर में एक अतिरिक्त उपभोक्ता बेंच प्रारंभ की गई है, जिससे मामलों के त्वरित एवं प्रभावी निपटारे में सहायता मिलेगी।
आगामी 02 वर्ष की कार्ययोजना
1. स्मार्ट-पीडीएस / सार्थक पीडीएस योजना का क्रियान्वयन
स्मार्ट-पीडीएससार्थक पीडीएस योजना केन्द्र प्रवर्तित योजना है। इस योजना में भारत सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सभी चरणों (राशनकार्ड प्रबंधन, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, खाद्यान्न वितरण आदि) का केन्द्रीकृत रूप से ऑनलाइन संचालन किया जावेगा। राज्य में स्मार्ट-पीडीएस योजना का क्रियान्वयन 2026 तक किये जाने की कार्य योजना है।
2. ऑफलाइन उचित मूल्य दुकानों को ऑनलाइन कराना
राज्य के दूरस्थ एवं ग्रामीण तथा नेटवर्कविहीन ग्राम पंचायतों में संचालित 704 उचित मूल्य दुकानों में नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण ऑफलाइन खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। ऐसे उचित मूल्य दुकान ऑफलाइन वितरित खाद्यान्न का समय-समय पर कनेक्टिविटी क्षेत्र में आकर विभागीय सर्वर में अपलोड किया जाता है। इन दुकानों में आधार प्रमाणीकरण से वितरण नहीं होता है। इन दुकानों में नेटवर्क कनेक्टिविटी की उपलब्धता हेतु दूरसंचार विभाग से समन्वय कर नेटवर्क की समस्या का निराकरण किये जाने की कार्ययोजना है।
3. राज्य के अन्य जिलों में ग्रेन एटीएम की स्थापना-
ग्रेन एटीएम में राशनकार्डधारी अपनी सुविधा के अनुसार चावल उठाव कर सकते है। राज्य के अन्य जिलों के राशनकार्डधारियों को उपरोक्त सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर की तरह अन्य जिलों में भी ग्रेन एटीएम स्थापित किये जाने की कार्य योजना है।
4. खाद्यान्न भण्डारण हेतु भण्डारण क्षमता का विस्तार-
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न भण्डारण तथा समर्थन मूल्य पर खरीदे गये धान की कस्टम-मिलिंग से प्राप्त चावल के भण्डारण हेतु राज्य भण्डार गृह निगम द्वारा 2.71 लाख टन क्षमता के नवीन गोदामों का निर्माण किये जाने की कार्ययोजना है। PEG स्कीम के अंतर्गत 3.5 लाख टन क्षमता के नवीन गोदाम निर्माण कार्य योजना है
5. सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन का विस्तार –
राज्य में एलपीजी गैस के स्थान पर पीएनजी गैस के उपयोग हेतु राज्य के लिए निर्धारित संस्थाओं के माध्यम से राज्य में पीएनजी गैस की उपलब्धता एवं आपूर्ति हेतु विभिन्न जिलों में पाईपलाईन विस्तार की कार्ययोजना है। आगामी 02 वर्षों में 12 जिलों में पीएनजी गैस उपलब्ध कराने की कार्ययोजना है।


