नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक कार्यालय का जिला पंचायत सीईओ ने किया शुभारंभ
जशपुर : राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक का स्वतंत्र कार्यालय बुधवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार के मुख्य आतिथ्य में शुभारंभ किया गया।
अब तक जिले में नाबार्ड के समस्त कार्य रायगढ़ स्थित जिला विकास प्रबंधक कार्यालय से समन्वित एवं संचालित किए जा रहे थे, क्योंकि जिला रायगढ़ से संबद्ध था।
स्वतंत्र कार्यालय प्रारंभ होने से अब किसानों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधा मिल सकेगी।
कार्यक्रम में अग्रणी जिला प्रबंधक, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक, बैंकर्स, कृषि विज्ञान केंद्र, विभिन्न विभागों के अधिकारी, किसान हितग्राही एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। नाबार्ड छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के वरिष्ठ अधिकारी बृजेन्द्र समांतराय भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। उन्होंने लाभार्थी किसानों से विस्तृत चर्चा की।
नवनियुक्त जिला विकास प्रबंधक प्रेम प्रकाश सिंह ने मुख्य अतिथि एवं उपस्थितजनों के समक्ष जिले की संभावनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने विशेष रूप से बागवानी एवं अन्य संभावित आर्थिक गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अब तक नाबार्ड द्वारा 12100 एकड़ क्षेत्र में वाड़ी फलोद्यान एवं अन्य कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से 13000 से अधिक आदिवासी परिवारों, जिनकी जनसंख्या लगभग 1 लाख है, को लाभान्वित किया गया है। गत 5 वर्षों में सदस्य किसानों ने 100 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी लाभ अर्जित किया है, जिसका वार्षिक औसत लगभग 25 करोड़ रुपये है एवं वार्षिक उत्पादन लगभग 9000 मीट्रिक टन है। जीवा परियोजना के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु किसान प्राकृतिक आदानों के नए सूत्र विकसित कर रहे हैं, जिससे प्राकृतिक खेती के पुनरुद्धार की आशा बढ़ी है।
इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने अग्रणी जिला प्रबंधक, नाबार्ड, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक, विभिन्न विभागों एवं कृषि विज्ञान केंद्र की उपस्थिति में नाबार्ड की संभाव्यता आधारित ऋण योजना जारी की। इस ऋण योजना आकलन में नाबार्ड द्वारा कृषि क्षेत्र में 865 करोड़ रुपये के ऋण की संभाव्यता प्रक्षेपित की गई है। जिले में प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में कुल ऋण की संभाव्यता 1428 करोड़ रुपये आंकी गई है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जिले में बागवानी विकास हेतु नाबार्ड के व्यापक हस्तक्षेप की सराहना की। उन्होंने नाबार्ड से सहमति व्यक्त की कि आगामी कदम के रूप में प्रसंस्करण क्षमता विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए एवं इसके लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के अंत में वाड़ी, जलग्रहण क्षेत्र एवं जीवा परियोजना के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अग्रणी किसान लाभार्थियों को सम्मानित किया गया।

