कुनकुरी की द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला; आरोपी पर लगा अर्थदंड, जेल भेजा गया
कुनकुरी : समाज में आपसी सौहार्द और रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करने वाले अपराधों पर न्यायपालिका ने एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है । छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने एक बुजुर्ग दंपती पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला करने वाले आरोपी प्रदीप कुजूर को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की कठोर सजा सुनाई है । न्यायालय ने साफ किया कि जान से मारने की नीयत से बुजुर्गों पर किया गया ऐसा हमला सामाजिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती है और यह किसी भी सूरत में क्षमा योग्य नहीं माना जा सकता । इस महत्वपूर्ण मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने प्रभावी पैरवी करते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई ।
तालाब के पास घात लगाकर किया था प्राणघातक हमला
यह खौफनाक वारदात 8 फरवरी 2025 की दोपहर करीब 2:30 बजे ग्राम डोभ रन्सीटोली (तहसील दुलदुला) में घटित हुई थी । अभियोजन की कहानी के अनुसार, पीड़ित लच्छू राम (70 वर्ष) और उनकी पत्नी देशी बाई (65 वर्ष) अपने घर के सामने स्थित तालाब में नहाने जा रहे थे । इसी दौरान पुराने ज़मीन विवाद को लेकर रंजिश पाले बैठे गांव के ही प्रदीप कुजूर (50 वर्ष) ने कुल्हाड़ी से लैस होकर उन पर हमला बोल दिया । आरोपी ने बुजुर्ग लच्छू राम के सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर उन्हें लहूलुहान कर दिया । जब पति को बचाने के लिए देशी बाई चीखते हुए आगे बढ़ीं, तो आरोपी ने क्रूरता की हदें पार करते हुए उनके सिर पर भी कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ तीन-चार प्राणघातक वार किए । हमला इतना भीषण था कि दोनों बुजुर्ग मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े ।
छह महीने तक चला जिंदगी और मौत का संघर्ष
घटना के तुरंत बाद दंपती के बेटों (सुरेन्द्र और शिशुपाल) ने 108 एम्बुलेंस की मदद से माता-पिता को पहले शासकीय अस्पताल दुलदुला पहुंचाया । चोटों की अत्यधिक गंभीरता को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल जशपुर, फिर मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर और अंततः अत्यंत गंभीर स्थिति में रायपुर के अस्पताल के लिए रिफर किया गया । चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय पर दोनों को इलाज न मिलता, तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौत निश्चित थी । बुजुर्ग दंपती को पूरी तरह ठीक होने में लगभग 6 महीने का लंबा वक्त लगा ।
कोर्ट रूम में वैज्ञानिक साक्ष्यों से बेनकाब हुआ आरोपी
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि गवाह आपस में रिश्तेदार हैं और चोटें सामान्य थीं । लेकिन अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह के मजबूत तर्कों और विवेचक निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों के आगे बचाव पक्ष टिक नहीं सका । फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट में घटनास्थल से जब्त खून से सनी मिट्टी, आरोपी की कुल्हाड़ी और पीड़ितों के कपड़ों पर मानव रक्त पाए जाने की पुष्टि हुई । न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल रिश्तेदारों के गवाह होने से उनकी विश्वसनीयता कम नहीं हो जाती । कोर्ट ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास) के तहत कड़ा दोषी पाया ।
अदालत का कड़ा संदेश: 10 साल की जेल और अर्थदंड
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना अंतिम फैसला सुनाया । कोर्ट ने आरोपी प्रदीप कुजूर को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 2,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया । अर्थदंड न पटाने की स्थिति में आरोपी को 6 महीने की अतिरिक्त सश्रम जेल काटनी होगी । इसके साथ ही, अदालत ने पीड़ितों के घावों और मानसिक प्रताड़ना को देखते हुए पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना (धारा-396 BNSS) के तहत उन्हें उचित मुआवजा दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर को भी निर्देश जारी किए हैं । फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद आरोपी के जमानत मुचलके निरस्त कर उसे सजा काटने के लिए जिला जेल जशपुर भेज दिया गया ।

