साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन हेतु बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 03 खाताधारकों को गिरफ्तार किया गया।
भारत सरकार के समन्वय पोर्टल एवं प्राप्त साइबर शिकायतों के परीक्षण में म्यूल खातों का उपयोग होना पाया गया।
आरोपियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध एवं अनाधिकृत ट्रांजेक्शन पाए गए।
अपराध क्रमांक 306/2026 में वैधानिक कार्यवाही करते हुए आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
दुर्ग : भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल एवं पुलिस मुख्यालय से प्राप्त सूचना के आधार पर थाना नेवई क्षेत्रांतर्गत संचालित केनरा बैंक के खातों का परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि विभिन्न साइबर ठगी प्रकरणों में प्रयुक्त रकम कुछ संदिग्ध खातों में प्राप्त हुई थी, जो म्यूल खातों की श्रेणी में आते हैं।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2024 से वर्ष 2026 के मध्य इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी से प्राप्त राशि को प्राप्त कर अन्य खातों में स्थानांतरित एवं आहरित किया गया, जिससे अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। जांच उपरांत 99 संदिग्ध खाताधारकों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 306/2026 धारा 318(2), 318(3), 318(4) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
विवेचना के दौरान बैंक से प्राप्त केवाईसी, खाता विवरण एवं ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट का परीक्षण किया गया, जिसमें आरोपियों के खातों में लाखों रुपये के अनाधिकृत लेन-देन पाए गए। आरोपियों की पहचान कर दिनांक 13.06.2026 को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों द्वारा अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड एवं मोबाइल सिम अन्य व्यक्तियों को साइबर ठगी से संबंधित अवैध आर्थिक लेन-देन के लिए उपलब्ध कराना स्वीकार किया गया। इसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ था। आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल दुर्ग भेजा गया।
आरोपी का नाम :
1. पवन दास मानिकपुरी
2. करण रंगारी
3. नरेन्द्र कुमार साहू
जप्त सामग्री :
1. केनरा बैंक पासबुक
2. एटीएम कार्ड
3. मोबाइल सिम कार्ड
4. बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज
सराहनीय भूमिका :
उक्त कार्यवाही में एसीसीयू टीम एवं थाना नेवई से निरीक्षक अनिल कुमार साहू, आरक्षक रवि बिसाई एवं आरक्षक प्यारे लाल की सराहनीय भूमिका रही।
दुर्ग पुलिस की अपील :
दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल सिम अथवा बैंकिंग संबंधी जानकारी उपयोग हेतु उपलब्ध न कराएं। ऐसा करना साइबर अपराध में सहभागिता माना जा सकता है तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

