समाज के विभिन्न वर्गो के भलाई हेतु उठाने होंगे कदम
फ्लाई ओवर के नीचे वाले खाली भाग का सही प्रयोग करना चाहिए
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टी वी कमेंटेटर, रायपुर. (छ ग.)
रायपुर : जब लोग यह बात करते हैं कि हमारे खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे देशों की अपेक्षा जिनका भारत से कम क्षेत्रफल,कम जनसंख्या है क्यों पिछड़ जाते हैं? इसके कई कारण हैं। सबसे पहली बात अब तक अधोसंरचना के निर्माण का अभाव रहा है, फिर शारीरिक बनावट,खान-पान, प्रशिक्षण, प्रतियोगी खेलकूद का वातावरण न होना है। इसके लिए किन्हें आगे आना चाहिए। उपरोक्त कमियों के लिए केंद्र या राज्य सरकार या केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम या औद्योगिक घरानों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। भारत में खेलों को लोकप्रिय बनाने याने घर-घर तक खेलकूद की जानकारी देने की पूरी कोशिश प्रिंट, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया द्वारा की जाती रही है। फिर भी खेलों में सहभागिता के प्रयास को सफलता लिएंडर पेस द्वारा 1996 एटलांटा ओलंपिक में टेनिस के एकल कांस्य और 2000 सिडनी ओलंपिक में भारत की पहली महिला कर्णम मल्लेश्वरी द्वारा भारोत्तोलन में कांस्य पदक जीत लेने के बाद मिली। वस्तुत: 1947 में मिली स्वतंत्रता के बाद के अब तक के खेलकूद के काल को तीन भागों में बांटा जा सकता है। पहला 1947 से 1987 तक का काल जिसमें हाकी के उत्थान से पतन लेकर क्रिकेट के लड़खड़ाते आरम्भ से लेकर सिरमौर बनने तक का सफर शामिल है। दूसरा 1988 से 2013 तक की अवधि जबकि टेनिस,भारोत्तोलन, निशानेबाजी, क्रिकेट,शतरंज, कबड्डी,खो-खो, मुक्केबाजी, बैडमिंटन जैसे खेलों का भारत में जड़ पकड़ने का दौरा था। इसके बाद 2014 से अब तक की अवधि को हम भारत में खेल – खिलाड़ियों के विकास की दृष्टि से स्वर्णकाल की ओर आगे बढ़ते कदम कह सकते हैं। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने कई खेलों जैसे ओलंपिक खेलों, खेल विशेष के विश्व चैंपियनशिप , एशियाड, अनेक खेलों के एशियाई चैंपियनशिप में भारत का नाम रौशन किया। विशेषकर इस दौरान हाकी का पुर्नभाव हुआ। अब समय आ गया है कि ओलंपिक में सम्मलित खेलों के इवेंट के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने का। इसके लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खेल मंत्रालय के कमान को अपने हाथों में संभाल कर रखा है तथा क्रियान्वयन के लिए 2004 एथेंस ओलंपिक के निशानेबाजी में रजत पदक विजेता को पहले खेल मंत्री के रूप में लेफ्टी. कर. राज्यवर्धन सिंह राठौर, उनके बाद किरण रिजीजू, और अब केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख माडविया को खेलो इंडिया मिशन के द्वारा पूरे देश में जमीनी स्तर से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की खोज उनके प्रशिक्षण आदि के देखरेख की जिम्मेदारी दे रखी है. हमारे देश में एक बड़ी समस्या यह है कि महानगरों, कस्बों, गांवों में खेल की अधोसंरचना या निर्माण 20वीं सदी के उत्तरार्ध में अपेक्षाकृत नहीं हो पाई है. इन दिनों एक बात खेल विशेषज्ञों के ध्यान में आई है कि हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों में आवागमन के लिए सड़कों का निर्माण बड़ी तेजी से चल रहा है।
इसमें शहरों, गांवों के आसपास से हो रहा है, फिर कई शहरों के बीच से ही फ्लाई ओवर का निर्माण हो रहा है। फ्लाई ओवर के नीचे कई बार एक खंबे से दूसरे खंबे तक 15 से 20 मीटर तक का अंतर होता है। नीचे सतह पक्की सीमेंट की बनी होती है। चर्चा हो रही है कि ऐसे जगह का इस्तेमाल खेल क्षेत्र के रूप में किया जाना चाहिए। कई जगह ऐसे फ्लाई ओवर की ऊंचाई 10से 12 मीटर तक है। जब सतह कड़ी पक्की होती है तो ऐसे स्थान का उपयोग बैडमिंटन, बास्केटबाल, व्हालीबाल, जूडो, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, ताईक्वांडो, कुश्ती,टेबल टेनिस जैसे ओलंपिक खेलों तथा क्रिकेट,शतरंज,कबड्डी, कैरम, खो-खो, मार्शल आर्ट से संबंधित गैर ओलंपिक खेलों के खेल क्षेत्र बनाने में लाया जाकर खेला जा सकता है। इसके अलावा बुर्जुर्गों के बैठने की जगह, दोपहिया वाहन पार्किंग, मजदूरों के विश्राम करने की जगह, महिलाओं, लड़कियों के लिए थोड़ी देर रुकने की जगह के रूप में भी किया जा सकता है। मुंबई के नवी मुंबई क्षेत्र में फ्लाई ओवर बनाया गया है। जिसमें खेलने की जगह है। जिसमें सभी खेलते हैं परंतु मुंबई हाईकोर्ट ने आरटीआई के माध्यम से लगाई याचिका पर स्पष्ट किया है कि फ्लाई ओवर के वास्तव में ऐसे खाली जगह का इस्तेमाल खूबसूरती के लिए किया जा सकता है जिसमें सुंदर फूल वाले बगीचा और दीवारों पर पेटिंग का सुझाव दिया गया है। चूंकि इस आदेश में कहीं पर यह स्पष्ट नहीं दिखता कि फ्लाई ओवर के नीचे खेल जोन , खेल मैदान नहीं बनाना चाहिए। अत: मुंबई हाईकोर्ट के दिशा निर्देश का पालन करते हुए फ्लाई ओवर के नीचे के खेल मैदान के सुझाव को भारत के साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य में निर्माण किए जा रहे फ्लाईओवर के नीचे वाले खाली में खेल क्षेत्र बनाने में लागू किया जाना चाहिए। इससे पूरे देश में खेल का वातावरण तैयार होगा साथ ही हमारे देश का खेलकूद के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित की गई विश्व में पहले पांच स्थान पर आने का विकसित भारत @ 2047 के अंतर्गत की सोच भी आकर लेगी।

