“सिर्फ शिविर नहीं, विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार करने की जरूरत” : वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस ने छत्तीसगढ़ की खेल नीति पर उठाए अहम सवाल

“सिर्फ शिविर नहीं, विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार करने की जरूरत” : वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस ने छत्तीसगढ़ की खेल नीति पर उठाए अहम सवाल

छत्तीसगढ़ के शासकीय शालाओं में ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर आरंभ

अत्याधुनिक परीक्षण से मिलेंगे विश्वस्तरीय खिलाड़ी

आलेख . जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, रायपुर (छ ग)

रायपुर : आज हमारे देश में चारों तरफ खेलकूद में प्रत्येक इंसान के सहभागिता की चर्चा हो रही है। ऐसा माना जाता है कि चाहे मन को प्रसन्न रखने की बात हो या शरीर को स्वस्थ रखने का इसके लिए खेल गतिविधियों के महत्व को दर्शाया है रहा है। शालाओं में कम उम्र के विद्यार्थियों को खेलों के बारे में जानकारी दी जा रही है। जीवन में खेल के द्वारा चुस्त दुरुस्त बनने से लेकर समय की पाबंदी, अनुशासन सीखने का अवसर मिलता है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए बचपन से ही विद्यार्थियों के अंदर खेलकूद के प्रति लगाव उत्पन्न करने की कोशिश की जाना जरूरी है। इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्रीष्मकालीन शालेय खेलकूद प्रशिक्षण शिविर का आयोजन रायपुर में किया गया है। इसी तरह का 21 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के शालाओं में प्रारंभ किया गया है। नवोदित खिलाडिय़ों तथा इच्छुक खिलाडिय़ों को निशुल्क प्रशिक्षण अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा दिया जा रहा है। जिन खेलों का समावेश किया गया है उनमें ओलंपिक खेलों जैसे व्हालीबाल, बास्केटबाल, फुटबाल, हैंडबाल, हॉकी, ताइकवांडो, टेबल-टेनिस, तीरंदाजी, भारोत्तोलन, जिमनास्टिक्स, एथलेटिक्स, कुश्ती, कयाकिंग /कैनोइंग शामिल है जबकि गैर ओलंपिक खेलों में साफ्टबाल, कबड्डी, कराते, कबड्डी, किक बॉक्सिंग, नेटबाल, मलखंब, खो-खो, टेनिक्वाइट, और साफ्ट टेनिस शामिल है। प्रशिक्षण 11 मई से 31 मई तक दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में पड़ रही अत्यधिक गर्मी के कारण प्रशिक्षण का समय प्रात: 06 से 08 बजे तक फिर शाम को 05 से 07 बजे तक निर्धारित है।

हमारे प्रदेश में विद्यार्थियों के लिए इस तरह के खेल प्रशिक्षण शिविर के आयोजन की यह वर्षों पुरानी परंपरा है। इस तरह के शिविर को छात्र-छात्राएं, प्रशिक्षक और आयोजक कितनी गंभीरता से लेते हैं यह तो पता नहीं परंतु सही मायने में ऐसे शिविर उदयीमान खिलाडिय़ों को चुनने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर होता है। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि कौन सा खिलाड़ी किस खेल के योग्य है इसकी जांच ऐसे ही शिविर से आसानी से किया जा सकता है। इस तरह के खेल प्रशिक्षण शिविर के आयोजन से अत्याधुनिक परीक्षण के द्वारा चुनकर आये खिलाड़ियों से केंद्र या राज्य सरकार को दीर्घकालिक लाभ हो सकता हो सकता है क्योंकि आगामी 2026, 2030, 2034 के राष्ट्रमंडल खेलों साथ ही इन्हीं वर्षों में एशियाई खेलों फिर 2026, 2030, 2034 के युवा ओलंपिक खेलों तक उन्हीं प्रतिभाशाली चयनित खिलाड़ियों को इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन नई दिल्ली द्वारा आयोजित आगामी वर्षों 2027 2029, 2031, 2033, 2035 के राष्ट्रीय खेलों के अलावा 2028, 2032, 2036 के ओलंपिक खेलों के लिए ओलंपिक संघ के आवश्यक 31 खेलों में मुकाबले में उतारकर दाव में लगाया जा सकता है। अतः भारत में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक न जीत पाने वाले खिलाडिय़ों की कमी को दूर करने के लिए 2026 की तरह के प्रशिक्षण शिविर चुनकर 8-9 वर्ष तक निरंतर गहन अभ्यास के द्वारा उपरोक्त प्रतियोगिता के लिए तैयार करने की दीर्घकालिक खेल नीति को अमलीजामा पहनाना चाहिए। आज के अत्याधुनिक चयन पद्धति के माध्यम से एक-एक खिलाड़ी के संबंध में उसकी रुचि, ऊंचाई, ताकत, त्वरित निर्णय क्षमता, दूरदृष्टि, खेल से लगाव आदि की जांच हो जाती है। ऐसे जांच के लिए भले ही एक खिलाड़ी एक हजार तक खर्च आ सकता है परंतु तय है कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की सूची बनकर तैयार हो जाएगी जो आने वाले दिनों में भारत का नाम रौशन करने की क्षमता रखेगी। सिर्फ प्रशिक्षण शिविर आयोजन करने से उसका उद्देश्य भले ही पूरा हो जाता है लेकिन भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ठोस निर्णय लेने का समय आ गया है। एक या दो वर्ष पैसा लगाकर अगर हम विश्व स्तरीय खिलाड़ी की खोज कर सकते हैं तो वह ज्यादा लाभप्रद होगा. छत्तीसगढ़ व भारत के हित में कुछ राशि खर्च करके हम अपना तथा देश का सपना पूरा कर सकते हैं।

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