तकनीक, त्वरित कार्रवाई और जनसहभागिता से सुरक्षित हो रहे कवर्धा के हरित वन
धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक)
अशोक कुमार चंद्रवंशी (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल में वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का बेहद प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। अत्याधुनिक ‘फायर अलर्ट सिस्टम’ के माध्यम से अब 25 हजार 436 हेक्टेयर वन क्षेत्र की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। इस तकनीक की बदौलत जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण पाना संभव हुआ है, जिससे शासन की तकनीक-आधारित वन सुरक्षा व्यवस्था को एक नई मजबूती मिली है।
एफएमआईएस प्रणाली से मैदानी अमला हुआ हाईटेक
कवर्धा परियोजना मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी 25 बीटों में फैले विशाल वन क्षेत्र की निगरानी के लिए वन विभाग ने एफएमआईएस (फॉरेस्ट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) को सक्रिय किया है। इस डिजिटल प्रणाली से सभी मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे जोड़ा गया है।
रियल-टाइम अलर्ट जैसे ही उपग्रह (सैटेलाइट) या किसी अन्य माध्यम से वन क्षेत्र में आग लगने की प्रारंभिक सूचना मिलती है, संबंधित बीट के कर्मचारियों के मोबाइल पर तुरंत अलर्ट पहुंच जाता है। इसके चलते बिना समय गंवाए वन कर्मी तत्काल मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लेते हैं।
जमीनी स्तर पर मुस्तैद अग्नि सुरक्षा श्रमिक
वनों को आग की विभीषिका से बचाने के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। फायर सीजन (गर्मी के मौसम) की शुरुआत से पहले ही संवेदनशील वन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर फायर लाइन की सफाई और तैयारी कर ली गई थी, ताकि आग को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में फैलने से रोका जा सके।
अत्याधुनिक संसाधन
प्रत्येक बीट में विशेष अग्नि सुरक्षा श्रमिकों की तैनाती की गई है। साथ ही सभी परिक्षेत्रों के अमले को आधुनिक फायर ब्लोअर उपलब्ध कराए गए हैं, जो हवा के तेज झोंकों से आग को तुरंत बुझाने में बेहद मददगार साबित हो रहे हैं।
सोशल मीडिया और जनसहभागिता का अनूठा मॉडल
सामूहिक प्रयासों से सुरक्षारू सूचनाओं के त्वरित और निर्बाध आदान-प्रदान के लिए विशेष सोशल मीडिया समूह (व्हाट्सएप ग्रुप आदि) बनाए गए हैं, जहां आग से जुड़ी छोटी सी खबर भी तुरंत उच्चाधिकारियों और मैदानी अमले के बीच साझा हो जाती है। इसके अतिरिक्त, वन क्षेत्रों के आसपास बसे गांवों में सघन जागरूकता अभियान चलाकर स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। ग्रामीण अब वन विभाग के श्कान और आंखश् बनकर काम कर रहे हैं, जिससे वनों की सुरक्षा एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।
कार्यों में पारदर्शिता और ऐतिहासिक परिणाम
वन विभाग द्वारा किसी भी क्षेत्र में आग पर नियंत्रण पाने के बाद, उस घटना की पूरी केस रिपोर्ट, प्रभावित क्षेत्र और की गई कार्रवाई की जानकारी विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाती है। इस डिजिटल रिकॉर्डिंग से कार्यों में पूरी पारदर्शिता बनी हुई है।
सकारात्मक परिणाम 23 अग्नि प्रकरण पर पूरी तरह नियंत्रण
इन समन्वित तकनीकी और व्यावहारिक प्रयासों का ही नतीजा है कि मार्च 2026 तक कवर्धा परियोजना मंडल में केवल 23 अग्नि प्रकरण सामने आए, जिन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए रिकॉर्ड समय में पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया। इस प्रभावी और मुस्तैद व्यवस्था से बहुमूल्य वन संपदा, जड़ी-बूटियों और वन्य जीवों को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने में बड़ी सफलता मिली है। तकनीक, सतर्कता और जनसहभागिता का यह कवर्धा मॉडल आज पूरे प्रदेश में वन संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।

