खेल अकादमी है पदकवीर खिलाड़ियों की जन्म स्थली
व्यवस्थित प्रशिक्षण की शुरुवात करके तैयार किए जा सकते हैं जुझारु खिलाड़ी
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टी वी कमेंटेटर. रायपुर.
रायपुर : खेलने के उत्सुक बच्चों किशोरों, युवाओं को अगर सही दिशा नहीं मिली तो फिर एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी बनने से पहले ही वे गुमनामी में खो जाते हैं। जीवन के किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञ बनने के लिए सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। अगर आप चिकित्सक बनना चाहते हैं तो आपको किसी चिकित्सा महाविद्यालय में अध्ययन करना होगा। इसी तरह पत्रकार, शिक्षक, वकील आदि बनना चाहते हैं तो संबंधित विषय के विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त करनी होगी। ठीक इसी तरह खिलाड़ी बनने के लिए खेल अकादमी में रहकर उस खेल से जुड़ी समस्त नियम, तकनीकी, शब्दावली से वाकिफ होना पड़ता है।
छत्तीसगढ के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा हाल ही में राज्य में स्थापित विभिन्न खेल अकादमी के लिए हमारे प्रदेश के साथ ही पूरे देश से आये उदयीमान प्रतिभागियों को चयनित किया गया। भले ही हमारे प्रदेश में खेल अकादमी का गठन छत्तीसगढ़ राज्य के 1 नवंबर 2000 को निर्माण के बाद विलंब से हुआ लेकिन फिर भी व्यक्तिगत रूप से कई अनुभवी खिलाड़ियों ने कम खर्च, कम सुविधा में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण देने में कोई कोताही नहीं बरती तथा अपने अपने खेलों में उभरते खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया। उनमें छत्तीसगढ़ में बास्केटबाल के महान खिलाड़ी और कोच स्व. राजेश पटेल का नाम सबसे प्रथम है।
उनकी अगुवाई में नवनिर्मित छत्तीसगढ़ राज्य के बास्केटबाल खिलाड़ियों ने अलग अलग आयु वर्ग में 60 से अधिक स्वर्ण, रजत , कांस्य पदक राष्ट्रीय स्पर्धाओं में जीते। इसके अलावा फुटबाल के लिए इस प्रदेश के सबसे समर्पित प्रशिक्षक मुश्ताक अली प्रधान ने अपने पारिवारिक जीवन को सपरे स्कूल रायपुर परिसर के एक कमरे में समेटते हुते आज करीब 40 से अधिक वर्षों से फुटबॉल खेल में बच्चों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। साथ ही भिलाई के अशोक गोंडाले ने घोर नक्सली इलाके के आदिवासी लड़कों को नारायणपुर आश्रम में रहकर फुटबॉल की बारीकियों को सिखाया।
इसके अलावा बैडमिंटन में संजय मिश्रा, श्रीमति कविता दीक्षित ,टेबल टेनिस में विनय बैसवाड़े हाकी में मृणाल चौबे, टेनिस में सेंटियागो भाइयों, क्रिकेट में राजेश चौहान, भारोत्तोलन में रायपुर के बुधराम सारंग और उनका परिवार, राजनांदगांव के स्वर्गीय पुरुषोत्तम आजमानी, अजय लोहार, शक्तित्तोलन में कृष्णा साहू, निशानेबाजी में सांसद नवीन जिंदल, हैंडबाल में बशीर खान, एथलेटिक्स में रफीक खान , पवन धनकर वॉलीबॉल में अकरम खान, सॉफ्टबॉल में श्री रेड्डी,ओ पी शर्मा जैसी छत्तीसगढ़ की महान विभूतियों ने इस प्रदेश में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर तैयार करने में कोई कमी नहीं की। इसके एवज में हमारे खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर के कई पदकों पर कब्जा जमाया।
व्यक्तिगत रूप से विभिन्न खेलों में प्रशिक्षण देने वालों का नाम भले ही जानकारी के अभाव में छूट रहा हो लेकिन कुश्ती, जुडो, कैनोइंग, नेटबॉल आदि खेलों में नए नए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया गया . उपरोक्त विवरण से यह बात साफ हो जाती है कि इस प्रदेश की माटी में न तो खेलने वालों, न ही खेल सीखाने वालों की कोई कमी है। अगरकुछ कमी रही तो अकादमी के लिए व्यवस्थित अधोसंरचना और सुविधा की।
इस कमी को अब छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन, खेल मंत्री अरुण साव के नेतृत्व, खेल सचिव यशवंत कुमार के लगन और संचालक श्रीमती तनुजा सलाम के सूझबूझ से पूरा करने का प्रयास जारी है। इस दिशा में पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में संचालित तीरंदाजी, फुटबाल, हाकी, कबड्डी, एथलेटिक्स की अकादमी के लिए खिलाड़ी चुने जा रहे हैं। इसमें चयनितों को शैक्षणिक व्यय, आवास, खेल सामग्री, भोजन आदि नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
खेल अकादमी की स्थापना करना कोई साधारण बात नहीं है. उसमें संबंधित खेल के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक के अनुसार मैदान,एरीना, कोर्ट, रिंग, मैट होना चाहिए। इसमें अभ्यास और मैच रात दिन खेले जा सके ऐसी सुविधा हो, अत्याधुनिक प्रशिक्षण उपकरण, आधुनिक जिम, आइस बाथ, स्टीम बाथ,फिजियोथेरेपी, चेजिंग रूम लड़के एवं लड़कियों का अलग अलग तथा एक तरणताल होना चाहिए। साथ ही साथ उसी परिसर में आहार विशेषज्ञ, चिकित्सा कक्ष, लाकर रूम और आधुनिक, स्नानगृह आदि जरूरी है। इसके अलावा एक वीडियो विश्लेषण कक्ष आवश्यक है।
टीम तैयार करने के लिए प्रशिक्षित कोच, चिकित्सा सुविधा, दवाइयां, मनोवैज्ञानिक याने मेंटल कोच होना चाहिए। अकादमी में एक खेल लाइब्रेरी जरूरी है। अकादमी में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि सभी खिलाड़ी इलेक्ट्रानिक मीडिया के द्वारा खेल की तकनीक को समझ सके। प्रिंट मीडिया में ऐसे साहित्य हो जिसमें पूर्व विश्व विजेता खिलाड़ियों के सफलता की जानकारी हो। अकादमी परिसर में प्रतिबंधित दवा के परिणाम व दुष्परिणाम की जानकारी देने वाले वीडियो और साहित्य अत्यंत आवश्यक है।
डाइनिंग हाल में मिनी थियटर भी होना चाहिए जिसके द्वारा खिलाड़ी अपना मनोरंजन कर सके। लड़के व लड़कियों का परिसर पूरी तरह अलग अलग होना चाहिये। खिलाड़ियों का आवास कक्ष साफ सुथरा, बिस्तर आरामदायक और हवादार तथा मच्छर विहिन होना चाहिए। अत: स्पष्ट है कि अकादमी में खिलाड़ी भर्ती कर लेना बड़ी बात नहीं परंतु उसमें से विश्व मंच पर भारत का तिरंगा लहराने वाले खिलाड़ी पैदा करना एक चुनौती है।

