तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सूरजपुर ने आपराधिक मानव-वध मामले में पिता-पुत्र को दी 10-10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा.
थाना सूरजपुर में अपराध क्रमांक 290/2024 धारा 302, 34 भादवि. का पंजीबद्ध कर की गई थी विवेचना.
सूरजपुर : न्याय व्यवस्था में निष्पक्ष सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर दिए गए निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास को और मजबूत करते हैं। सूरजपुर जिले के एक चर्चित आपराधिक मानव-वध मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय यह दर्शाता है कि गंभीर अपराधों पर न्यायालय की पैनी नजर बनी हुई है। पिता-पुत्र को दोष सिद्ध पाए जाने पर सश्रम कारावास की सजा ने एक बार फिर न्याय की सख्ती और संवेदनशीलता दोनों को सामने रखा है।
दिनांक 27 मई 2024 को ग्राम पर्री निवासी धीरसाय सिंह ने थाना सूरजपुर में सूचना दिया था कि दिनांक 26 मई 2024 को घर के पास रहने वाली शान्तीबाई उसके घर रात्रि 8:00 बजे आकर बताई कि जगरनाथ को उसके पिता रामभरोष एवं उसके भाई शिवचरण अपने घर के बाहर आम पेड़ में उल्टा लटकाकर मारपीट कर रहे हैं एवं वहीं बैठे हैं। किसी को आसपास नहीं आने दे रहे हैं, जिसकी सूचना पाकर पुलिस को फोन किया और उप सरपंच 108 एम्बुलेंस को सूचना दिया तब पुलिस के साथ जाकर देखा तो जगरनाथ को आम पेड़ पर उल्टा लटका दिया था मृतक जगरनाथ के पिता रामभरोष और उसका भाई शिवचरण सिंह डण्डा लिये मौजूद थे पूछने पर पिता भाई ने बताया कि हमेंशा बहुत परेशान करता था, इसलिए मारपीट कर उल्टा लटकाये हैं। जगरनाथ जीवित था जिसे 108 एम्बुलेंस आने पर जिला अस्पताल सूरजपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टर द्वारा जगरनाथ को मृत होना बताया है। प्रार्थी की रिपोर्ट पर मर्ग कायमी उपरांत थाना सूरजपुर में अपराध क्रमांक 290/2024 धारा 302, 34 भादवि. का पंजीबद्ध कर विवेचना की गई।
मामले की विवेचना थाना प्रभारी सूरजपुर विमलेश दुबे के द्वारा की गई। विवेचना के दौरान दोनों आरोपियों के विरूद्ध पुख्ता साक्ष्य संकलित करते हुए आरोपी रामभरोष सिंह पिता हरकलाल उम्र 55 वर्ष ग्राम पर्री व शिवचरण सिंह पिता रामभरोष उम्र 33 वर्ष ग्राम पर्री गौटियापारा थाना सूरजपुर को गिरफ्तार कर आरोप-पत्र माननीय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय सूरजपुर में पेश किया गया था। प्रकरण का संचालन अपर लोक अभियोजक के.के.नाविक द्वारा किया गया।
इस मामले की सुनवाई विद्धान न्यायाधीश श्री डायमंड कुमार गिलहरे, तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सूरजपुर के यहां हुई। माननीय न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी कर निर्णय दिनांक 07 अपैल 2026 में प्रकरण के आरोपियों के विरूद्ध हत्या कारित किए जाने का अपराध प्रमाणित न पाते हुए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आपराधिक मानव-वध का अपराध प्रमाणित पाए जाने पर आरोपी रामभरोष सिंह व शिवचरण सिंह को धारा 304, 34 भारतीय दण्ड संहिता के अपराध हेतु 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास व 10-10 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया है।

