खेल प्रेमियों के लिए रोड़ा बन रहा प्रसारण एकाधिकार
खेलों की दुनिया में मैच को जीवंत दिखाए जाने की बढ़ती मांग और उसका असर.(सब हेडिंग )
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी के खेल कमेंटेटर.
रायपुर : आमतौर पर यह बात देखने में आई है कि एक समय था जब किसी टूर्नामेंट के सीधे प्रसारण के लिए मीडिया राइट्स पाने लाखों रुपये की बोली लगाई जाती थी।1996 से 2018 तक की अवधि में सोनी, जी इंटरटेनमेंट, स्टार स्पोर्ट्स, टेन स्पोर्ट्स आदि चैनल में किसी न किसी खेल की प्रतियोगिता के अंतर्गत होने वाले मुकाबलों के लाइव टेलीकास्ट के लिए एक दूसरे से बढ़कर बोली लगाई जाती थी परंतु समय के परिवर्तन के अनुसार अब टेलीविजन के अलावा सोशल मीडिया, यूट्यूब के माध्यम से सीधे मोबाइल में भी दुनिया में खेली जा रही किसी भी खेल स्पर्धा को देखा जा सकता है।
अब जियो स्टार द्वारा वायकाम 18, डिज्नी स्टार तथा स्टार इंडिया को खरीद लेने के कारण जियो स्टार नामक प्रसारण की बड़ी कंपनी हो गई तब उसके संचालक मंडल द्वारा बड़ी से बड़ी राशि देकर प्रसारण के अधिकार को खरीदने की परंपरा आरंभ हुई।इस तरह के प्रसारण एकाधिकार से क्या लाभ क्या हानि किसे हुई इसका पता हमें आगे चलकर विश्लेषण से प्राप्त आंकड़ों से होगा। हम देखेंगे पिछले लगभग एक दशक तक जियो स्टार का क्रिकेट में मीडिया राइट्स का एकाधिकार रहा। स्टार ने 2024 से 27 के लिए करीब 2400 करोड़ रूपये, में सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के विभिन्न चैंपियनशिप के मुकाबले के प्रसारण अधिकार को खरीदा।
परंतु इसी दौरान जियो स्टार में समाहित हो जाने के कारण अपने पुराने समझौते में से एक वर्ष पूर्व 2026-27 से ही प्रसारण अधिकार को छोड़ दिया। अब स्थिति यह है कि आई.सी.सी ने 2026-29 के लिए प्रसारण अधिकार लगभग 1632 करोड़ में दिये जाने का प्रस्ताव बोली बोलने वालों के समक्ष रखा है लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई प्रसारण कंपनी इसे लेने को तैयार नहीं है। और इसके लिए वे आईसीसी को ब्लैक मेल कर रहे है कि उन्हें कम कीमत 1400 करोड़ में तीन वर्ष का प्रसारण अधिकार दे दिया जाए . ठीक इसी तरह प्रसारण के अधिकार के लिए अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल परिषद याने फीफा के द्वारा 2026 और 2030 के विश्वकप के 208 मैच के लिए भारत के टेलीविजन या डिजिटल प्लेटफार्म को 900 करोड़ रुपये में बेचने का प्रस्ताव रखा परंतु अभी तक कोई लेनदार सामने नहीं आया है। कतर में 2022 के विश्वकप फुटबाल के मीडिया राइट को वायकाम 18 ने 527 करोड़ में खरीदा था।
इस प्रकार जैसे-जैसे परिस्थिति बदलती जा रही है वैसे वैसे खरीददार अपना रंग गिरगिट के समान बदल रहे हैं।क्रिकेट हो या फुटबाल या फिर कोई और खेल उसके प्रसारण अधिकार के खर्च जितना कम या ज्यादा होगा उसका प्रत्यक्ष असर मैच के दौरान दिखाए जाने वाले उत्पादकों के उत्पादक कंपनी के साथ ही मैच का आनंद लेने वाले खेल प्रेमियों को होगा परंतु इस चक्कर में सबसे बड़ी हानि आम जनता की होती है। उत्पाद का विज्ञापन करते हैं तो उत्पादक उसका भार आम जनता पर डाल देते हैं। अर्थात उत्पाद के क्रय करने वालों को अधिक दाम देकर अपनी पसंद की वस्तु को खरीदना पड़ता है।
दूसरी तरफ मुकाबले का जीवंत प्रसारण देखने वाले खेल प्रेमियों- दर्शकों को नेट-डाटा पर अधिक धन राशि देनी पड़ती है। इस सच्चाई से कोई भी इंकार नहीं कर सकता कि फुटबाल इस संसार का सबसे लोकप्रिय खेल है।2026 में इसके 104 मुकाबले मैक्सिको,कनाडा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के 16 शहरों में होंगे। इसके करीब 86 मैच का सीधा प्रसारण भारतीय समय के अनुसार रात्रि 12 बजे से सुबह 06 बजे के बीच होगा।
अब इसी बात को लेकर भारतीय प्रसारण कंपनी वायकाम 18 और हाट स्टार ने फीफा के समक्ष आपत्ति की है। उन्होंने अपना यह तर्क देते हुए कि मैच के प्रसारण की अधिकांश अवधि में भारत में मध्यरात्रि व सोने का समय होगा अत: न सिर्फ देखने वालों की संख्या कम होगी बल्कि उत्पादक भी अपनी वस्तु का विज्ञापन बड़ी संख्या में नहीं देंगे अत: प्रसारण अधिकार की राशि को कम किया जाए। आखिरकार फीफा ने भारतीय प्रसारक को 315 करोड़ रुपये में प्रसारण अधिकार देने का प्रस्ताव रखा है। अभी तक कोई प्रसारक सामने नहीं आया है। अत: असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
फीफा और मीडिया राइट्स के बीच इस तरह के उहापोह की स्थिति में भारतीय खेल प्रेमी विशेषकर फुटबाल प्रेमी और साथ ही साथ अपने उत्पाद का विज्ञापन देने वाले दोनों ही उलझन में फंसे हुए हैं। इस समस्या का क्या हल होगा पता नहीं लेकिन खेल प्रेमियों को यह समझ लेना चाहिए कि प्रसारण करने वाली संस्था पहले अपना फायदा देखती है।

