अंतिम समय में क्यों चित्त हो जाते हैं भारतीय पहलवान ?
22 वीं एशियन कुश्ती चैंपियनशिप 2026, किर्गिस्तान,बेशक में सम्पन्न
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, रायपुर
रायपुर : भारतवासियों के लिए प्रसन्नता की बात है कि हमारे प्रतिभागी विभिन्न खेलों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर की चैम्पियनशिप में कुछ वर्ष पहले की अपेक्षा अब लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय पहलवानों ने विगत 6 से 12 अप्रैल तक किर्गिस्तान, बिशेक में सम्पन्न 22 वीं एशियाई कुश्ती स्पर्धा 2026 में दो स्वर्ण, छ: रजत तथा 09 कांस्य के साथ कुल 17 पदकों पर कब्जा जमाया।
इस प्रतियोगिता में 14 एशियाई देशों ने भाग लिया जिसमें भारत को पांचवा स्थान प्राप्त हुआ। पहले स्थान पर ईरान के पहलवान रहे जिन्होंने 06-06-06 स्वर्ण, रजत, कांस्य सहित 18 पदक जीता, दूसरे स्थान पर जापान 06-05-04 सहित कुल 15 पदक, तीसरे स्थान पर 05-01-08 सहित 14 पदक जीतकर चीन, चौथे स्थान पर किर्गिस्तान के पहलवानों ने 5-1-6 सहित कुल 12 पदक अपने नाम किए। अगर कुल पदकों की संख्या देखी जाए तो भारत के पहलवानों ने ईरान द्वारा 18 पदक जीत लेने के बाद 17 पदक जीतकर सर्वाधिक पदक जीतने वाले देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
जिसकी वजह से इस प्रतियोगिता में भारत के पुरुष पहलवानों ने फ्री स्टाइल में 162 अंक प्राप्त कर दूसरा जबकि 178 अंकों के साथ ईराक प्रथम स्थान पर रहा. ग्रीको रोमन पुरुष वर्ग में भारत के पहलवानों ने चौथा स्थान जबकि महिलाओं के फ्री स्टाइल में भारत की महिलाओं ने पांचवा स्थान प्राप्त किया। पुरुष वर्ग की बात करें तो भारत की ओर से दो स्वर्ण पदक फ्री स्टाइल के 65 किलोग्राम वर्ग में सुजीत कालकल तथा 70 किलोग्राम वर्ग में अभिमन्यु मंडवाल ने जीता।
पदक सूची के अनुसार स्पष्ट है कि भारत के तीन पुरुष पहलवान अमन सेहरावत, संदीप मान, मुकुल दहिया जबकि पुरुष ग्रीको-रोमन में ललित सेहरावत, नितेश सिचाव फाइनल मुकाबले में पराजित हुए इसी तरह महिला फ्री स्टाइल वर्ग में भारत की मीनाक्षी गोयत हारी। परंतु सबसे चौंकाने वाला परिणाम तो महिला वर्ग का रहा जिसके चार पहलवान हंसिका लांबा, नेहा सांगवान, मोनिका, हर्षिता मोर सेमीफाइनल में चित्त हो गई। इसी तरह पुरुष फ्री स्टाइल वर्ग में सेमीफाइनल तक का सफर तय करके फायनल में जगह नहीं बना पाने वाले दो पुरुष पहलवान अंकुश चंद्रम, दिनेश धनखर थे. उधर ग्रीको रोमन वर्ग से सचीन सेहरावत, प्रिंस पहलवान, सुनील कुमार तीन पहलवान सेमीफाइनल में पराजित हुए।
इसमें कोई की दो मत नहीं कि विश्व खेल मंच में भारतीय पहलवानों का भविष्य उज्जवल है इसे हमारे प्रतिभागियों ने ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में 2008 में लगातार 2024 तक एक न एक पदक जीतकर साबित कर दिया है। फिर भी जबकि इस वर्ष 2026 में एशियाड और राष्ट्रमंडल खेल होना है। तब खेल सिर्फ कुश्ती ही नहीं परंतु कोई भी कोर गेम्स हो भारतीय खिलाडिय़ों को जैसे पहले दूसरे राउंड के मुकाबले को गंभीरता से लिया उसी तरह पूरी सजगता और चतुराई से सेमीफाइनल और फाइनल के भिड़ंत को भी लेना चाहिए। 22 वीं एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप के परिणामों पर एक नजर डालेंगे तो स्पष्ट लगता है कि हमारे 06 पहलवान फायनल में परास्त होकर स्वर्ण पदक से वंचित हुए जबकि 09 पहलवान सेमीफायनल में पटखनी खा गये।
परिणामों का विश्लेषण इस तरह करने से स्पष्ट हो जाता है कि हमारे पहलवानों में न तो दमखम की कमी है और न ही साहस की बल्कि हूटर बजने से कुछ ही क्षण पहले धैर्य की कमी,मन में नतीजे को लेकर हड़बड़ाहट के कारण पराजय होती है। 2014 के पश्चात माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में खिलाडिय़ों, प्रशिक्षकों, सहायक स्टाफ को खान पान, ठहरने, अत्याधुनिक खेल उपकरण, खेल एरिना आदि उपलब्ध कराई जा रही है।
सच कहा जाय तो हमारे देश के खेलमंत्री मनसुख मांडविया , केंद्र सरकार में खेल मंत्रालय के प्रशासनिक अधिकारी और भारतीय खेल प्राधिकरण याने साईं के प्रत्येक जिम्मेदार अधिकारी सकारात्मक रूप से अपनी भूमिका निभा रहे हैं फिर भी क्या वजह है हमारे पहलवानों से यह चूक हुई। इसकी प्रमुख वजह खिलाडिय़ों में स्वयं के अंदर आत्मविश्वास की कमी और खेल के अंतिम क्षणों में उचित रणनीति का प्रयोग नहीं करना है।
हालांकि 2036 के ओलंपिक खेलों का भारत में आयोजन होने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है लेकिन भारत के खिलाडिय़ों की तैयारी को धारदार बनाए जाने की आवश्यकता है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर की अलग अलग प्रतियोगिताओं में लगातार भाग लेने की योजना से निश्चित रूप से खिलाड़ियों के प्रदर्शन में न सिर्फ अंतर आएगा बल्कि जो कमी 22 वीं एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में उजागर हुई है वैसी कमी दूर होती चली जाएगी।

