तकनीक के सहारे सुरक्षित और तेज रेल संचालन: 36 से अधिक स्टेशनों पर सिग्नलिंग अपग्रेड, मल्टी-ट्रेन मूवमेंट संभव, मानवीय त्रुटियों में भारी कमी

तकनीक के सहारे सुरक्षित और तेज रेल संचालन: 36 से अधिक स्टेशनों पर सिग्नलिंग अपग्रेड, मल्टी-ट्रेन मूवमेंट संभव, मानवीय त्रुटियों में भारी कमी

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान संरक्षा, क्षमता और समयबद्धता में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के विस्तार से संरक्षित, तीव्र और निर्बाध रेल परिचालन को मिला नया आयाम

बिलासपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग वित्तीय वर्ष 2025-26 में संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आधुनिक सिग्नलिंग प्रणालियों के व्यापक विस्तार के माध्यम से रेल परिचालन को और अधिक संरक्षित, तीव्र एवं समयबद्ध बनाने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।

रेलवे संरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से परंपरागत सिग्नलिंग प्रणाली के स्थान पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) एवं ऑटोमेटिक सिग्नलिंग जैसी उन्नत तकनीकों का तीव्र गति से विस्तार किया गया है, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हुई है तथा ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बना है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (नई स्थापना) – 11 स्टेशन

वर्ष 2025-26 में 11 स्टेशनों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की गई, जिससे जटिल यार्ड संरचनाओं में भी सुरक्षित एवं निर्बाध ट्रेन संचालन सुनिश्चित हुआ। प्रमुख स्टेशन हैं –

गोंदिया (506 रूट), उरगा (46 रूट), किरोड़ीमल नगर (223 रूट), कोथारी रोड (41 रूट), रायगढ़ (286 रूट), सारागांव देवरी (117 रूट), चक्रधर नगर (174 रूट), कुरुद (32 रूट), बाराद्वार (198 रूट), पेंड्रा रोड (226 रूट) एवं बालपुर रोड (26 रूट)।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (संशोधन) – 25 स्टेशन

25 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में उन्नयन/संशोधन कार्य कर संरक्षा मानकों को और अधिक सुदृढ़ किया गया। इससे सिग्नलिंग सिस्टम की विश्वसनीयता में वृद्धि हुई तथा निर्बाध परिचालन सुनिश्चित हुआ है।

पैनल इंटरलॉकिंग (संशोधन) – 09 स्टेशन

9 स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग प्रणाली में संशोधन कर उसे अधिक संरक्षित एवं कुशल बनाया गया, जिससे ट्रेन परिचालन में सुगमता एवं संरक्षा सुनिश्चित हुई।

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग – 186 किलोमीटर

वर्ष 2025-26 में कुल 186 किलोमीटर में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का विस्तार किया गया, जो संरक्षा एवं क्षमता वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रमुख सेक्शन निम्नलिखित हैं –

दगोरी–निपनिया (18 कि.मी.),

गुदमा–गंगाझरी (26 कि.मी.),

उरकुरा–सरोना (11 कि.मी.),

कोतरलिया–जामगा (27 कि.मी.),

चांपा–सारागांव (20 कि.मी.),

रायगढ़–चक्रधर नगर–कोतरलिया (30 कि.मी.),

निपनिया–भाटापारा (30 कि.मी.),

रायगढ़–जेएसपीएल–किरोड़ीमल नगर (24 रूट किमी) ।

संरक्षा में गुणात्मक सुधार

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली के माध्यम से अब एक ही सेक्शन में एक साथ एक से अधिक ट्रेनें संरक्षित रूप से संचालित की जा रही हैं। प्रत्येक ब्लॉक सेक्शन को छोटे-छोटे खंडों में विभाजित कर सिग्नलिंग व्यवस्था को और अधिक सटीक बनाया गया है, जिससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी स्वतः सुनिश्चित होती है।

* इस प्रणाली के लागू होने से—ट्रेनों के बीच सुरक्षित अंतराल बना रहता है ।

* सिग्नल फेल होने की स्थिति में स्वतः संरक्षा सुनिश्चित होती है ।

* मानवीय त्रुटियों की संभावना अत्यंत कम हो जाती है ।

* विफलता में उल्लेखनीय कमी आती है ।

क्षमता एवं समयबद्धता में वृद्धि

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग एवं इंटरलॉकिंग के विस्तार से ट्रेन संचालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब एक ही रूट पर कम समय अंतराल में अधिक ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिससे लाइन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ ट्रेनों की समयबद्धता भी बेहतर हुई है।

यह सभी उपलब्धियाँ महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के दूरदर्शी नेतृत्व, कुशल निर्देशन एवं सतत प्रोत्साहन का प्रतिफल हैं। उनके मार्गदर्शन में सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने आधुनिक तकनीकों को तीव्र गति से अपनाते हुए न केवल संरक्षा मानकों को नई ऊँचाई दी है, बल्कि परिचालन क्षमता और समयबद्धता में भी उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित किया है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग भविष्य में भी इसी प्रकार उन्नत तकनीकों को अपनाते हुए संरक्षा, क्षमता एवं विश्वसनीयता के नए मानक स्थापित करने के लिए सतत प्रयासरत है ।

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