रोलबाल के रोमांच से थिरकेंगे दुनियां के युवा : बीस बरस बाद बहुखेल स्पर्धा राष्ट्रमंडल खेलों का होगा भारत में आयोजन
आलेख … जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ खेल पत्रकार, रायपुर
रायपुर : भारत में पहली बार 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ था। अब 2030 में भी इन खेलों को दुबारा आयोजित करने की अनुमति मिल गई है। कामनवेल्थ गेम्स या राष्ट्रमंडल खेलों में वास्तव में उन देशों को शामिल किया जाता है जिन पर कभी ग्रेट ब्रिटन के राजशाही परिवार का शासन रहा हो। अब कुल ऐसे देशों तथा केंद्र शासित क्षेत्रों की संख्या 74 है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर इस टूर्नामेंट के आयोजनकर्ताओं को भारतीय ओलंपिक संघ के माध्यम से यह प्रस्ताव प्रेषित किया गया था कि 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों को भारत के अहमदाबाद में कराये जाने के लिए भारत तैयार है।
अब भारत के प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है जिसमें 15 से 17 खेलों को शामिल किए जाने की संभावना है। जिसमें तीरंदाजी, बैडमिंटन, 3x 3 बास्केटबाल, व्हालीबाल, 3 x 3 व्हीलचेयर बास्केटबाल, बीच व्हालीबाल, किकेट टी-20, सायकलिंग, डायविंग, हाकी, जूडो रीदमेटिक, जिमनास्टिक्स, रग्बी सेवन, निशानेबाजी, स्क्वैश, ट्राइथलान ,पैरा ट्राइथलान और कुश्ती शामिल है। राष्ट्रमंडल खेलों के नियमानुसार आयोजक कोई दो नये खेल या पारंपरिक खेलों को शामिल करने का सुझाव राष्ट्रमंडल आयोजन समिति को दे सकता है।
बात यही पर आकर ठहर गई है कि आखिर किस खेल को 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्थान दिया जाए? भारत के पारंपरिक खेलों में कबड्डी, खो-खो प्रमुख हैं। इसके अलावा मार्शल आर्ट से संबंधित कई खेल, किक बाक्सिंग, सेपक तकरा और रोलबाल जैसे खेल भी इस राष्ट्रमंडल खेलों 2030 में अपनी प्रविष्टि का इंतजार कर रहे हैं। दो नये खेल या पारंपरिक खेलों में से एक कबड्डी को शामिल किए जाने से किसी को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन दूसरे खेल के लिए जोर आजमाईश जारी है।
इसमें सिर्फ़ खो-खो, रोलबाल के अलावा लगभग सभी खेल भारत की देन नहीं है। खो-खो और रोलबाल में से किसी एक खेल को 2030 के राष्ट्रमंडल खेल में 15 से 17 खेलों के अलावा शामिल किया जाना उचित होगा। खो-खो और रोलबाल में से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रोलबाल खेल का जन्म भारत में 2003 में पुणे में हुआ जिसके खोजकर्ता पुणे के एक शारीरिक प्रशिक्षण देने वाले राष्ट्रवादी शिक्षक राजू दभाड़े हैं। यह खेल 21 वीं सदी का सबसे तेजी से लोकप्रिय होता हुआ खेल है.आज की परिस्थिति में विश्व में पांचों महाद्वीपों के करीब 60 देशों में खेला जा रहा है।
इस दृष्टि से खो-खो के मुकाबले कम अवधि में पूरी दुनिया में लोगों के दिल, विशेषकर युवाओं की पहली पसंद बनने वाला खेल रोलबाला हो चुका है। इस खेल को इंटरनेशनल रॉलबाल एसोसिएशन द्वारा मान्यता दी जा चुकी है। इसका पहली बार टूर्नामेंट 2005 में आयोजन किया गया था। रोलबाल के मैदान में मैच में एक बार में 06 /06 खिलाड़ी होते है. सभी खिलाड़ी और निर्णायक पैर में रोलर स्केट्स पहनकर में उतरते हैं और कोर्ट में गेंद को लेकर विपक्षी टीम पर गोल करता है. गेंद को कब्जे में लेकर भागने से तेज रफ्तार खेल और खिलाडिय़ों की फुर्ती दर्शकों के मन मस्तिष्क में रोमांच पैदा कर देता है।
इनडोर स्टेडियम में इस खेल को 40&20 मीटर की कड़ी सतह वाले कोर्ट में खेला जाता है। खेल की अवधि 20-20 मिनट की दो पारी होती है। और खेल का संचालन दो निर्णायकों द्वारा किया जाता है। जिसमें अब आधुनिक तकनीक डीआरएस से भी निर्णय लिए जाने का प्रावधान किया गया है। रोलबाल के सीनियर में पुरुष वर्ग में 2011, 13,15, 17, 19, 23 और 2025 में सात विश्वकप साथ ही महिला वर्ग में 2011, 13, 15, 17, 19, 23, 2025 में कुल सात विश्वकप स्पर्धा हो चुकी है।
इसी तरह बालक/बालिका दोनों वर्ग में जूनियर विश्वकप का आयोजन दो बार किया जा चुका है। रोलबाल दुनिया के युवाओं के बीच तेजी से उभरता हुआ खेल है। भारत की गोद में जन्म लिये इस खेल को राष्ट्रमंडल खेल में शामिल किए जाने से भारतीय युवा शक्ति में नये और आकर्षक खेल को चुनने का विकल्प मिल सकेगा।

