खेल जगत पर युद्ध की मार : वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस ने उठाए गंभीर सवाल — अशांति के माहौल में खिलाड़ियों की मेहनत, खेल अर्थव्यवस्था और वैश्विक आयोजनों पर बढ़ता खतरा

खेल जगत पर युद्ध की मार : वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस ने उठाए गंभीर सवाल — अशांति के माहौल में खिलाड़ियों की मेहनत, खेल अर्थव्यवस्था और वैश्विक आयोजनों पर बढ़ता खतरा

आपसी विवाद लड़ाई-झगड़े से खेल जगत प्रभावित

मानवता को शर्मसार करता युद्ध,खेलकूद के लिए घातक

रायपुर : विश्व में अशांति, पड़ोसी देशों के बीच लड़ाई, विभिन्न देशों में सत्ता संघर्ष ऐसे कई कारण है जीजिसकी वजह से मानव समाज अलग-अलग ढंग से असर पड़ता है। इन दिनों अमेरिका, इजराजल एक साथ मिलकर ईरान से युद्ध कर रहे हैं तो ईरान द्वारा अमेरिका समर्थित अरब देशों पर हमला जारी है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया है। उधर पिछले चार वर्ष से अधिक अवधि से रूस और यूक्रेन के मध्य लड़ाई जारी है। इस तरह के अशांत माहौल का असर सिर्फ व्यापार, व्यवसाय, पर्यटन, फिल्म जगत, वैज्ञानिक खोज, औद्योगिक विकास स्वास्थ्य,शिक्षा विकास कार्यों पर ही नहीं पड़ता है परंतु मनुष्य गतिविधि का एक और क्षेत्र है जिस पर अशांति,युद्ध का स्पष्ट प्रभाव पड़ता है, वह है इस प्रकार के माहौल में खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन का नहीं हो पाना। प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास पर दृष्टि करने से खेल आयोजन के रद्द किये जाने की कोई विशेष घटना का उल्लेख नहीं मिलता है।अलबत्ता प्राचीन ओलंपिक खेलों के लगातार आयोजन अर्थात् ईसा पूर्व 776 से ईस्वी सन् 393 तक याने लगभग 1169 वर्षों तक अनवरत जारी रहने के बाद रोमन सम्राट थियोडोसियस प्रथम द्वारा इन खेलों पर प्रतिबंध लगा दिया था। जिसका कारण रोमी शासकों द्वारा मूर्ति पूजा पर रोक की कोशिश करके ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार को बढ़ावा देना था। हालांकि समय के परिवर्तन के साथ साथ वैचारिक मतभेद दूर होते गये और जीवन में खेलकूद के महत्व को अनिवार्य माना गया तब 1896 में यूनान के शहर एथेंस में आधुनिक ओलंपिक खेलों का आयोजन आरंभ हुआ। जो आज भी जारी है। आज की परिस्थिति में खेल भी एक बड़ा उद्योग का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक परिषद ने 2021-2024 के बीच करीब 700 अरब रुपये का संग्रहण किया। इसी तरह फीफा याने फुटबाल के अंतर्राष्ट्रीय संघ के पास 590 अरब रूपये का भंडार था। इसी तरह भारत के भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की संपत्ति करीब 190 अरब रुपये है। इसी तरह टेनिस, बेडमिंटन,बेसबाल, बास्केटबाल, आइस हाकी आदि प्रमुख खेलों की संपत्ति विश्व खेल संगठन या बोर्ड के हिसाब से अनुमानतः 80 अरब रुपये से कम नहीं है।

खेलों की दुनिया में आने वाला दस वर्ष याने 2036 तक का समय बहुत ही महत्वपूर्ण है। 2028, 2032, 2036 में ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेल तथा इसी अवधि में पैरालिंपिक्स 2026, 2030, 2034 में एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल और विश्वकप फुटबाल का आयोजन होना है। इसी तरह विभिन्न खेलों की विश्व चैंपियनशिप तथा महाद्वीपीय स्पर्धा का आयोजन होना है।उपरोक्त खेल आयोजनों के बारे में 6 से 8 वर्ष पूर्व निर्णय ले लिये जाते हैं ताकि आयोजक अधोसंरचना का निर्माण कर सके और खिलाड़ियों , अतिथियों के ठहरने, परिवहन, भोजन आदि की समुचित व्यवस्था कर सके। अगर वर्तमान में जारी युद्ध जारी रहेगा तो आयोजक देशों को किए गए तैयारी के कारण करोड़ों की धनराशि का नुकसान हो सकता है। जैसा कि इतिहास गवाह है कि प्रथम विश्व युद्ध के कारण 1916 के आधुनिक ओलंपिक खेल जबकि दूसरे विश्व युद्ध के कारण 1940,1944 के खेलों को रद्द किया गया था जिससे आयोजकों को करोड़ों रुपये की हानि हुई थी। किसी भी खेल आयोजन के रद्द होने से भाग लेने वाले खिलाड़ियों की तैयारी को हानि पहुंचती है। कई प्रतिभागी अधिक उम्र होने के कारण सेवानिवृत्त होने के करीब होते हैं वे भाग नहीं ले पाते हैं .अत: आज हर खेल प्रेमी को यह अपने ईष्ट देव से प्रार्थना करनी चाहिए की वे युद्ध में शामिल शासकों को सद्बुद्धि दे ताकि वे युद्ध को समाप्त करे और सारे संसार में जनजीवन सामान्य हो सके।

आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ खेल पत्रकार
Chhattisgarh Exclusive