“ओलंपिक विजन के साथ बने खेल नगरी” – वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस ने कहा : बिना दीर्घकालिक योजना के 400 करोड़ का बजट भी हो सकता है व्यर्थ, एक समान अंतरराष्ट्रीय मानक के इंडोर स्टेडियम मॉडल की तत्काल जरूरत

“ओलंपिक विजन के साथ बने खेल नगरी” – वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस ने कहा : बिना दीर्घकालिक योजना के 400 करोड़ का बजट भी हो सकता है व्यर्थ, एक समान अंतरराष्ट्रीय मानक के इंडोर स्टेडियम मॉडल की तत्काल जरूरत

ओलंपिक में शामिल खेलों के आधार पर हो स्टेडियम का निर्माण : छत्तीसगढ़ राज्य के 2026-27 बजट में खेलकूद के लिए बढ़ाई गई राशि

आलेख ( जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार )

रायपुर : इस राज्य के निर्माण को 25 वर्ष हो चुके हैं। यहां पर विभिन्न विभागों में अनेक योजनाओं को मूर्तरूप दिया जा चुका है। कुछ नई योजनाएं शुरू की गई है। सब कुछ 2047 के विकसित भारत के उद्देश्य को पूर्ण करने को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उठाया गया सकारात्मक कदम लगता है। खेलकूद के क्षेत्र में अगर कोई उपलब्धि हासिल करना चाहता है तो दो-तीन बातें बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। एक-स्पर्धा में शामिल होने वाले खिलाड़ी में उस खेल के प्रति लगाव। दो- अभ्यास के लिए अत्याधुनिक खेल सामग्री और तीसरी बात-खेलकूद के लिए उपयुक्त खेल मैदान याने अधोसंरचना।

इन जरूरतों को लेकर खेल से जुड़े हुए भूतपूर्व खिलाड़ी, वर्तमान खिलाड़ी, खेल प्रशिक्षक, खेल पत्रकार, खेल प्रशासक और खेल प्रेमी सभी आशान्वित हैं क्योंकि इसमें कोई दो मत नहीं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा केंद्र में 2014 से खेलकूद को सही दिशा देने के लिए जो कदम उठाए गए उसे हमारे देश के खेल इतिहास में नए युग का आरम्भ माना जाएगा। 1947 से 2014 तक की अवधि में भारत की जनसंख्या लगभग 47 करोड़ से 147 करोड़ होने के बावजूद खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नगण्य उपलब्धि को प्रधानमंत्री ने गंभीरता से लिया और अच्छे परिणाम के लिए भारत के खेल मंत्रालय के साथ भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा खेलकूद को बढ़ावा देने का ठोस निर्णय लिया गया।

जमीनी स्तर से खेल प्रतिभाओं को ढूंढकर खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से भारत के अनेक शहरों, कस्बों में खेल अधोसंरचना का निर्माण कराया जा रहा है जिसमें प्रमुखत: ओलंपिक में शामिल खेलों को बढ़ावा दिए जाने का निर्णय लिया गया है। इस हेतु केन्द्र सरकार ने 2014-15 में खेलकूद के लिए आबंटित लगभग 710 करोड़ रुपए को बढ़ाते हुए 2026 /2027 तक खेल बजट को करीब 2700 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसी के दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ के 2026-27 के खेल बजट में 400 करोड से अधिक का प्रावधान किया गया है। खेल बजट को गंभीरता से अध्ययन करने पर स्पष्ट हो जाता है कि खेल गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ खेल मंत्री अरुण साव द्वारा प्रदेश में खेल अधोसंरचना और खेल अकादमी के गठन पर ज्यादा जोर दिया गया है।

छोटे शहरों और कस्बों में खेल स्टेडियम के निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की गई है। इसमें इंडोर स्टेडियम भी बनाया जाएगा। वस्तुत: जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का आयेाजन हमारे देश के अहमदाबाद में कराए जाने के लिए प्रयासरत हैं वास्तव में उसी का ध्यान रखते हुए ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में शामिल 28 कोर गेम्स के लिए इंडोर स्टेडियम का निर्माण कराना चाहिए। खेलकूद में अगर दूरदृष्टि से निर्णय नहीं लिया गया तो फिर ये स्टेडियम आने वाले समय में खंडहर बनकर रह जाएंगे।

2028 के लास एंजिल्स ओलंपिक खेलों में 36 खेल शामिल किए गए हैं उनमें तीरंदाजी, कैनोइंग, क्रिकेट, फील्ड हाकी, फुटबाल, गोल्फ, मार्डन पेंटाथालन, नौकायन ,पाल नौकायन रग्बी-7, स्पोर्ट्स क्लाइबिंग, सर्फिंग ट्राइथलान, बीच व्हालीबाल ये 14 ऐसे खेल हैं जो खुले आसमान के नीचे खेला जाता है। तैराकी, निशानेबाजी, एथलेटिक्स, साइक्लिंग , गोल्फ के स्टेडियम अलग से बनाये जाते हैं। जबकि बाकी बचे 17 खेल इंडोर स्टेडियम में खेले जाएंगे। इंडोर स्टेडियम को बनाते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रत्येक इंडोर स्टेडियम के निर्माण का नक्शा अलग-अलग जिलों में अलग अलग-आर्किटेक्ट द्वारा नहीं बनाया जाना चाहिए। इससे खर्च बढ़ता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों से 5 करोड़ रु की लागत से निर्मित होनेवाले इनडोर स्टेडियम का नक्शा मंगवाना चाहिए. इसके बाद राज्य स्तर पर एक सर्वमान्य नक्शा इंडोर स्टेडियम का किसी एक आर्किटेक्ट का एप्रूव्ड कर लेना चाहिए। फिर उसी आधार पर पूरे प्रदेश में एक ही जैसा इंडोर स्टेडियम बनाया जाना चाहिए।

इंडोर स्टेडियम में खेल के लिए 50 मीटर चौड़ा तथा 90 मीटर लंबा खेल क्षेत्र हो तथा ऊंचाई 10 मीटर का होना चाहिए। अगर इतनी जगह है तो ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के बाकी बचे 16 खेल को एक ही छत के नीचे कराया जा सकेगा साथ ही वास्तव में इंडोर स्टेडियम का निर्माण किसी वरिष्ठ खेल विशेषज्ञ, पूर्व खिलाड़ी, वरिष्ठ खेल पत्रकार, खेल अधिकारी, खेल प्रशासक की देखरेख में होना चाहिए। अतः खेलो के विकास में उपरोक्तानुसार कदम उठाया जाना वक्त की पुकार है तभी आबंटित राशि जा सही उपयोग हो सकेगा।

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