दीपक बैज का आरोप – आज़ादी की लड़ाई में चाटुकार रहे लोग अब वंदे मातरम् की वर्षगांठ को बना रहे हैं सियासी इवेंट

दीपक बैज का आरोप – आज़ादी की लड़ाई में चाटुकार रहे लोग अब वंदे मातरम् की वर्षगांठ को बना रहे हैं सियासी इवेंट

रायपुर : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार और राज्य सरकार आज से वंदे मातरम की 150वी वर्षगांठ मना रही है। अच्छी बात हैं, लेकिन भाजपा को इस कार्यक्रम के साथ ही देश की आजादी की लड़ाई के विरोध के लिए देश की जनता से माफी भी मांगना चाहिए। वंदे मातरम आजादी की लड़ाई का अग्र गीत था, आजादी के परवाने वन्दे मातरम गीत गागा के अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते थे। जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तब भाजपा के पितृ संगठन के लोग मुस्लिम लीग के साथ मिल कर अंग्रेजी सरकार की चाटुकारिता करते थे। आरएसएस के उस समय के सभी नेताओं ने आजादी की लड़ाई का विरोध किया था। आर एसएस का मूलतः गठन 1925 में हुआ देश आजाद 1947 में हुआ इन 22 सालों में देश की आजादी की लड़ाई में इनका क्या योगदान था भाजपा बताए ।अंग्रेजों की चाटुकारिता करने वाले किस नैतिकता से वंदे मातरम की वर्षगांठ मना रहे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि वंदे मातरम् का राजनैतिक इवेंट आयोजन करने के पहले भाजपा को कांग्रेस का धन्यवाद करना चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने 1896 में अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में सामूहिक गायन करके प्रथम बार इसको मान्यता दी सम्मान दिया और 1937 में राष्ट्रीय गीत घोषित किया। ये संघी भाजपाई क्या मानेंगे? पहले संविधान और तिरंगा को नकारा और अब झुकना पड़ रहा है। कंपनी राज के दलाल पहले अंग्रेजी की चापलूसी करते थे अब अडानी के। सत्ता में बने रहने के लिए ये अब गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। दरअसल भाजपा नेता अपने पित्र संगठनों के कालिख भरे इतिहास पर पर्देदारी करने का कुत्सित प्रयास कर रहे है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम भारतीयों के भावना का प्रतीक है, जन जन के हृदय में बसा है, यह स्वतंत्रता आंदोलन का नारा था जिसका विरोध भारतीय जनता पार्टी के पितृ संगठनों ने आजादी के आंदोलन के दौरान करते रहे। आरएसएस और महासभा के लोगों ने अंग्रेजों के साथ मिलकर स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में नकारात्मक भूमिका निभाई। 1876 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर रचित इस देशभक्ति गीत का प्रथम प्रकाशन 1882 में हुआ उसके बाद, 1896 के कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद से ही प्रसिद्धि मिली, जन-जन तक पहुंचा और तब से ही कांग्रेस के प्रत्येक कार्यक्रम में होता है, भाजपा और आरएसएस बताएं कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से उनको इतनी ही हिकारत क्यों है? क्यों भाजपा और आरएसएस अपनी शाखा और भाजपा कार्यालयों में वंदे मातरम गाने से परहेज़ करते रहे? भाजपा बताएं कि अब तक जिसका विरोध करते रहे उस पर इवेंट आयोजित करना सियासी विवशता है या राजनैतिक पाखंड?

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