78 साल बाद ऐतिहासिक सपना पूरा! बइरबी–सायरंग रेल परियोजना से मिज़ोरम पहली बार जुड़ा राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से

78 साल बाद ऐतिहासिक सपना पूरा! बइरबी–सायरंग रेल परियोजना से मिज़ोरम पहली बार जुड़ा राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से

बइरबी – सायरंग रेल परियोजना : मिज़ोरम को पहली बार राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली ऐतिहासिक पहल !

बिलासपुर, 10 सितम्बर 2025 : उत्तर-पूर्व भारत में रेल संपर्क को नई दिशा प्रदान करने वाली बइरबी – सायरंग रेल परियोजना को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है । आज़ादी के 78 वर्षों के बाद पहली बार मिज़ोरम की राजधानी आइजोल को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने का यह ऐतिहासिक अवसर है ।

लगभग 51.38 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन असम के बइरबी स्टेशन से प्रारंभ होकर मिज़ोरम के सायरंग तक पहुँचती है । इसे चार चरणों में पूरा किया गया है –

•               बइरबी – हरतकी (16.72 किमी)

•               हरतकी – कावनपुई (9.71 किमी)

•               कावनपुई – मुअलखांग (12.11 किमी)

•               मुअलखांग – सायरंग (12.84 किमी)

इस परियोजना के अंतर्गत 4 नये स्टेशन – हरतकी, कावनपुई, मुअलखांग और सायरंग विकसित किए गए हैं । ये सभी स्टेशन आधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस हैं तथा यात्री और मालगाड़ियों दोनों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए गए हैं ।

करीब 8071 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना को भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग परियोजनाओं में गिना जाता है । कठिन पहाड़ी इलाका, घने जंगल और लगातार भारी वर्षा जैसी प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद यह परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी की गई ।

इस परियोजना में कुल 48 सुरंगें (12,853 मीटर लंबाई), 55 बड़े पुल, 87 छोटे पुल, 5 रोड ओवर ब्रिज (ROB) और 6 रोड अंडर ब्रिज (RUB) निर्मित किए गए हैं । इनमें सबसे महत्वपूर्ण संरचना पुल संख्या 196 है, जिसकी ऊँचाई 114 मीटर है, जो क़ुतुब मीनार से भी 42 मीटर ऊँचा है ।

यह रेल लाइन मिज़ोरम की राजधानी आइजोल के नजदीक तक पहुँचती है । मिज़ोरम की सीमाएँ म्यांमार और बांग्लादेश से जुड़ी होने के कारण यह परियोजना सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है ।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 29 नवम्बर 2014 को इस परियोजना की आधारशिला रखी थी । अब इसके पूर्ण होने से मिज़ोरम का असम एवं शेष भारत से संपर्क सुगम होगा । आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति तेज़ी से होगी, व्यापार एवं औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार उपलब्ध होंगे ।

साथ ही, मिज़ोरम की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर तक आसान पहुँच बनने से पर्यटन को नया आयाम मिलेगा । इससे स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार और आजीविका के स्थायी अवसर भी सृजित होंगे ।

यह परियोजना न केवल आर्थिक और सामाजिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है ।

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