ट्रक ड्राइवर की बेरहमी से हत्या, व्हील पाना बना मौत का हथियार, कुनकुरी कोर्ट ने आरोपी खलासी को सुनाई उम्रकैद की सजा

ट्रक ड्राइवर की बेरहमी से हत्या, व्हील पाना बना मौत का हथियार, कुनकुरी कोर्ट ने आरोपी खलासी को सुनाई उम्रकैद की सजा


कुनकुरी जिला न्यायालय (जशपुर) में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने एक सनसनीखेज हत्याकांड पर बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी खिलानंद सिंह उर्फ राजू उर्फ टेढ़ू (उम्र 30 वर्ष, निवासी बरबसपुर, जिला सूरजपुर) को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और ₹1000 जुर्माने की सजा सुनाई।

इस पूरे प्रकरण में अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। उन्होंने गवाहों की गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और जब्त सबूतों को तार्किक ढंग से न्यायालय के सामने प्रस्तुत किया।


यह वारदात 8 दिसंबर 2022 की रात 7:30 बजे की है। जशपुर जिले के लावाकेरा बार्डर ढाबा के पास तीन ट्रक खड़े थे। ड्राइवर और खलासी ट्रक के भीतर गैस चूल्हे पर खाना बना रहे थे। इसी दौरान अचानक आरोपी खलासी खिलानंद सिंह ने अपने ही ड्राइवर आशिक अली पर हमला बोल दिया। आरोपी ने ट्रक से लोहे का भारी व्हील पाना उठाया और आशिक अली के सिर और चेहरे पर लगातार 2–3 वार किए। कुछ ही पलों में आशिक अली लहूलुहान होकर बेहोश हो गया और ढाबा किनारे सन्नाटा छा गया।


इस पूरे कांड का सबसे अहम गवाह ट्रक ड्राइवर शमशेर आलम था। अदालत में उसने कांपती आवाज़ में कहा –मैंने अपनी आंखों से देखा कि खिलानंद सिंह बार-बार आशिक अली के सिर और चेहरे पर पाना से वार कर रहा था। खून तेजी से बह रहा था… यह दृश्य रोंगटे खड़े करने वाला था। मैं दौड़कर ढाबा मालिक और दूसरे ड्राइवरों को बुलाने गया, लेकिन तब तक आरोपी मौके से फरार हो गया।”


गंभीर रूप से घायल आशिक अली को साथी ड्राइवरों ने उसी ट्रक से तलसरा (उड़ीसा) अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक इलाज के बाद उसे सुंदरगढ़ जिला अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन वहां डॉक्टरों ने बताया कि चोट इतनी गहरी थी कि उसे बचाना मुश्किल है। आखिरकार, उसी रात करीब 11 बजे आशिक अली ने दम तोड़ दिया।


सुंदरगढ़ जिला अस्पताल से आई एमएलसी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि मौत सिर पर गहरी चोट के कारण हुई। जांच में मौके से बरामद खून से सना व्हील पाना, ड्राइवर सीट कवर, रक्त, बाल और नाखून जैसे सबूत अदालत में पेश किए गए। अदालत ने कहा कि यह सबूत इस बात को पुख्ता करते हैं कि हत्या योजनाबद्ध और जानबूझकर की गई।


अदालत ने कहा –सहकर्मी की नृशंस हत्या समाज और कानून के लिए गंभीर चुनौती है। आरोपी ने जिस बर्बरता से हमला किया, वह क्षम्य नहीं। न्याय सुनिश्चित करने के लिए कठोर दंड ही उचित है।”

इस आधार पर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। यदि वह ₹1000 का जुर्माना नहीं भरता है तो उसे अतिरिक्त 6 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा। अभियुक्त खिलानंद सिंह 17 अप्रैल 2023 से जेल में न्यायिक अभिरक्षा में है और अब तक 2 वर्ष 4 माह 2 दिन कैद भुगत चुका है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अवधि को उसकी सजा में समायोजित किया जाएगा।


अदालत ने मृतक आशिक अली के भाई शेरे अली को धारा 357(ए) दं.प्र.सं. के तहत पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना से आर्थिक सहायता दिलाने का आदेश दिया। इसके लिए निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जशपुर को भेजे गए।

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