महादेव सट्टा एप से जुड़े सायबर फ्रॉड गैंग को कुनकुरी कोर्ट ने माना दोषी: करोड़ों के ऑनलाइन ठगी केस में चार को 3-3 साल की सजा

महादेव सट्टा एप से जुड़े सायबर फ्रॉड गैंग को कुनकुरी कोर्ट ने माना दोषी: करोड़ों के ऑनलाइन ठगी केस में चार को 3-3 साल की सजा

ग्रामीणों के नाम से फर्जी बैंक खातों का नेटवर्क चलाकर महादेव सट्टा एप से जोड़े गए खाते

अदालत ने संगठित साइबर ठगी को बताया गंभीर अपराध, पिता-पुत्र समेत चार दोषियों को 3-3 साल की जेल और जुर्माना

₹124 एटीएम कार्ड, 125 चेकबुक, 28 करोड़ से ज्यादा का ट्रांजैक्शन, जप्त हुआ साजो-सामान

कुनकुरी, 13 जुलाई 2025 | छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक सनसनीखेज ऑनलाइन ठगी का खुलासा हुआ है, जहाँ नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं और ग्रामीणों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और नकद लेकर उनके नाम से फर्जी बैंक खाते खुलवाए गए और करोड़ों रुपये का अवैध ऑनलाइन लेन-देन किया गया। इस मामले में न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी मानते हुए तीनतीन वर्ष की कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से शासन का प्रतिनिधित्व श्री संजय विश्वकर्मा, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ए.डी.पी.ओ.) ने किया।

प्रकरण में पुलिस ने जिस संगठित गिरोह का खुलासा किया है, उसमें पिता-पुत्र की ताम्रकार तिकड़ी और एक सहयोगी युवक शामिल है, जो महादेव सट्टा ऐप” से जुड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह को खाता उपलब्ध करवाने में संलिप्त पाए गए हैं। अदालत ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 420/34 के तहत दोषी ठहराते हुए 3-3 वर्षों की कठोर कारावास और ₹5000-₹5000 का जुर्माना लगाया है।

क्या है पूरा मामला?

थाना तपकरा क्षेत्र के निवासी विकास लकड़ा ने 16 जुलाई 2024 को थाने में शिकायत दी थी कि मनोज ताम्रकार और उसके पुत्र सुकेश ताम्रकार तथा चन्द्रसेन ताम्रकार उनके घर आकर बोले कि यदि वे नौकरी करना चाहते हैं, तो कुछ औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। इसके लिए ₹5000 नगद देने और आधार कार्ड, पैन कार्ड की आवश्यकता बताए गए।

प्रार्थी ने भरोसे में आकर दस्तावेज़ और पैसे सौंप दिए। बाद में बार-बार पूछने पर गोलमोल जवाब दिए गए और कहा गया कि जैसे ही सरकारी वेकेंसी निकलेगी, नौकरी लगवा देंगे। इस दौरान उनसे तीन लाख रुपये की व्यवस्था रखने को भी कहा गया।

फर्जी खातों से 26.76 करोड़ का लेनदेन

जांच के दौरान यह सामने आया कि केवल विकास लकड़ा ही नहीं, बल्कि कई अन्य ग्रामीणों से भी इस प्रकार दस्तावेज़ लिए गए और फर्जी बैंक खाते खुलवाए गए। इन खातों के माध्यम से ₹26 करोड़ 76 लाख का संदेहास्पद ऑनलाइन लेनदेन किया गया।

प्रशासन और बैंकिंग अधिकारियों की जांच में स्पष्ट हुआ कि इन खातों का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य संदिग्ध लेन-देन के लिए किया गया था।

न्यायिक फैसला: सभी आरोपी दोषी करार

प्रकरण की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री नरेंद्र कुमार तेंदुलकर की अदालत में हुई, जहाँ न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से माना कि सभी आरोपियों ने संगठित रूप से ग्रामीणों के विश्वास को ठगते हुए एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। अदालत ने आरोपीगण – चंद्रसेन ताम्रकार (26), सुकेश ताम्रकार (25), मनोज ताम्रकार (58) और योगेश साहू (23) – को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 420 सहपठित धारा 34 के अंतर्गत तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर ₹5000 का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में सभी आरोपियों को अतिरिक्त एक-एक माह का कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने इस अपराध को सामाजिक विश्वास के विरुद्ध एक सुनियोजित और संगठित साजिश बताया, जिसके चलते अभियुक्तों को आपराधिक परिवीक्षा का लाभ नहीं दिया गया।

न्यायालय ने क्या कहा?

न्यायालय ने माना कि अभियुक्तगण का अपराध गंभीर है, और यह सामाजिक विश्वास के विरुद्ध एक संगठित साइबर अपराध है। उन्होंने ग्रामीणों के भोलेपन का लाभ उठाकर, डिजिटल बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग किया। इसलिए, उन्हें आपराधिक परिवीक्षा का लाभ नहीं दिया गया।

Breaking Crime Exclusive Jharkhand