श्रीविद्यामठ वाराणसी में हुआ विशेष विमोचन समारोह :  गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने की मुहिम को मिला सिंधी समाज का आशीर्वाद, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा गो प्रतिष्ठा अभियान पुस्तिका का विमोचन, सिंधी समाज ने जताया समर्थन.

श्रीविद्यामठ वाराणसी में हुआ विशेष विमोचन समारोह :  गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने की मुहिम को मिला सिंधी समाज का आशीर्वाद, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा गो प्रतिष्ठा अभियान पुस्तिका का विमोचन, सिंधी समाज ने जताया समर्थन.

परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा देश के अन्य शंकराचार्यों एवं अनेक गोप्रेमी संगठनों का साथ लेकर गौमाता के प्राणों की रक्षा व उनको राष्ट्रमाता घोषित कराने हेतु चलाए जा रहे गौमाता राष्ट्रमाता प्रतिष्ठा आंदोलन को देश विदेश में बसा सिंधी समाज तन-मन-धन से साथ देगा। यह संकल्प परम धर्म संसद 1008 के केन्द्रीय कार्यालय श्रीविद्यामठ, वाराणसी में मसन्द सेवाश्रम रायपुर छत्तीसगढ़ के पीठाधीश एवं परम धर्म संसद 1008 के संगठन मंत्री, सिंधी समाज के विख्यात संत साईं जलकुमार मसंद साहिब जी की अध्यक्षता में आयोजित शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा देश विदेश में बसे सिंधी समाज के गो प्रतिष्ठा अभियान से जुड़ने सम्बंधी पुस्तिका के किये गये विमोचन के कार्यक्रम में उभर कर सामने आया।

पूज्यपाद शंकराचार्य महाराज जी ने बताया कि मसंद सेवाश्रम रायपुर के पीठाधीश, जिन्हें हाल ही में प्रयागराज में संपन्न महाकुंभ के दौरान हमारी संस्था परम धर्म संसद 1008 का संगठन मंत्री भी नियुक्त किया गया है, ने वर्ष 2012 से 2015 के मध्य देश के सभी शंकराचार्यों, संतों के सभी 13 अखाड़ों के प्रमुख महंतों, उनके द्वारा सुझाए गए लगभग 130 पदाधिकारियों महामंडलेश्वरों, गायत्री परिवार, आर्य समाज आदि अनेक प्रसिद्ध धार्मिक संगठनों के प्रमुखों तथा अनेक अन्य महान संतों के साथ बैठकें कर तिथियां तय की थीं तथा बैठकें की थीं। उन्होंने देश में सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित धर्म का राज स्थापित कर भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने की अपनी कार्ययोजना से हम सभी को अवगत कराया था। उनका यह प्रयास देश में सनातन धर्म के राज, जिसे हिंदू राष्ट्र भी कहा जा सकता है की आवश्यकता का वातावरण बनाने में बहुत सहायक हुआ।

कार्यक्रम में वाराणसी की सेन्ट्रल सिंधी पंचायत, अनेक मुहल्ला सिंधी पंचायतों, धार्मिक व सामाजिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी व अन्य गणमान्य नागरिकों के साथ-साथ शंकराचार्य महाराज जी से जुड़े विभिन्न संगठनों के भी प्रमुख लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। शंकराचार्य महाराज जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि अलग-अलग मंदिरों में अलग-अलग देवी देवताओं के विग्रह प्रतिष्ठित हैं, लेकिन किसी भी मंदिर में 33 कोटि देवी देवता प्रतिष्ठित नही हैं। लेकिन हमारे पूर्वजों ने गौमाता में 33 कोटि देवी देवताओं की प्रतिष्ठा की। इसलिए आज भी हमारे घरों में पहली रोटी गाय को समर्पित कर यह माना जाता है कि 33 कोटि देवी देवताओं को भोग लग गया। उन्होंने कहा कि हमें देशी नस्ल के गायों की पहचान कर भावी पीढ़ी हेतु उनकी रक्षा करनी होगी। गौमाता को राष्ट्रमाता रूप में प्रतिष्ठित कराने के बाद उनकी स्थिति में अंतर आएगा।

आयोजन की अध्यक्षता करते हुए पूज्य साईं जलकुमार मसन्द साहिब जी ने कहा कि हम जब शंकराचार्य जी महाराज को और उनके द्वारा किए जा रहे धर्मकार्यों को देखते हैं तो लगता है कि ईश्वर ने शंकराचार्य जी महाराज को अपने प्रतिनिधि के रूप में हम सबके मध्य भेजा है। पूज्य महाराज जी द्वारा धर्म रक्षा हेतु अनेक कार्यों के साथ गौमाता के प्राणों की रक्षा हेतु चलाए जा रहे आंदोलन से यह बात स्वयं सिद्ध भी हो जाती है। उन्होंने कहा कि गो प्रतिष्ठा अभियान भारत में सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित धर्म के शासन की स्थापना का आधार बनेगा और इससे भारत के पुनः विश्वगुरु बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। अत: आज हम सिंधी समाज के सभी जिम्मेदार लोग संकल्पपूर्वक शंकराचार्य जी के गौरक्षा आंदोलन के प्रति स्वयं को समर्पित कर रहे हैं और शंकराचार्य जी के धर्मकार्यों में तन-मन-धन से अपनी सहभागिता सदैव सुनिश्चित करेंगे।

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